
उज्जैन. धार्मिक नगरी उज्जैन में पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार भारी बारिश अब आम जनजीवन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी पड़ने लगी है। बुधवार सुबह शहर के एमआर-5 रोड पर एक बेहद चौंकाने वाला हादसा सामने आया, जहां शिव शक्ति सीमेंट एजेंसी की दुकान के बाहर माल उतारने के लिए खड़ा एक भारी-भरकम ट्राला सीमेंट की सड़क अचानक धंसने के कारण असंतुलित होकर पास के गहरे नाले में पलट गया। इस हादसे में जहां लाखों रुपये का माल पूरी तरह बर्बाद हो गया, वहीं ट्राला चालक की जान बाल-बाल बच गई।
सड़क के नीचे की मिट्टी बहने से हुआ हादसा दुकान संचालक और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि लगातार हो रही बारिश की वजह से नाले के किनारे बनी कंक्रीट सड़क के नीचे की मिट्टी पूरी तरह बह चुकी थी, जिससे ऊपरी सड़क खोखली और बेहद कमजोर हो गई थी। बुधवार सुबह जैसे ही सीमेंट से लोड ट्राला दुकान के सामने क्रेन या मैन्युअल तरीके से अनलोडिंग के लिए खड़ा हुआ, कमजोर जमीन भारी वजन सह नहीं पाई और ताश के पत्तों की तरह ढह गई। वाहन देखते ही देखते तिरछा हुआ और सीधे नाले में जा गिरा।
3.50 लाख की सीमेंट पानी में मिलकर बनी 'पत्थर' ट्राला पलटने के कारण उसमें लदी सैकड़ों सीमेंट की बोरियां नाले के गंदे पानी और कीचड़ में समा गईं। दुकान संचालक के मुताबिक, पानी में भीगने के कारण करीब 3.50 लाख रुपये मूल्य की सीमेंट पूरी तरह खराब हो चुकी है, जो अब किसी काम की नहीं रही। राहत की बात यह रही कि गाड़ी के पलटते समय ड्राइवर ने मुस्तैदी दिखाई और केबिन से कूदकर अपनी जान बचाई, जिससे उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई है।
व्यापारियों में भारी आक्रोश, निगम पर लापरवाही का आरोप इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों और क्षेत्रीय व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा। व्यापारियों का आरोप है कि नाले के पास सड़क के खोखले होने और उसकी जर्जर स्थिति को लेकर नगर निगम प्रशासन को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी गई थीं। लेकिन कुंभकरणी नींद में सोए अधिकारियों ने समय रहते इसकी मरम्मत नहीं कराई। लोगों का साफ कहना है कि यदि भ्रष्टाचार और लापरवाही को दरकिनार कर समय पर कार्रवाई की गई होती, तो आज इस बड़े आर्थिक नुकसान और हादसे को टाला जा सकता था।
शिप्रा नदी उफान पर, तटीय मंदिरों में घुसा पानी दूसरी तरफ, उज्जैन और आसपास के कैचमेंट एरिया में हो रही लगातार बारिश के कारण मोक्षदायिनी शिप्रा नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। नदी का पानी तेजी से बढ़ने के कारण रामघाट समेत आसपास के कई छोटे-बड़े मंदिर पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। बाढ़ जैसे हालातों को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। सुरक्षा के लिहाज से नदी के संवेदनशील और गहरे पानी वाले घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया गया है और तटीय इलाकों में मुनादी कराकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की हिदायत दी जा रही है।
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