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उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर विवाद पर बैकफुट पर प्रशासन: IIT इंदौर ने की जांच, रिपोर्ट के बाद ही फैसला


उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के दृष्टिगत सड़क चौड़ीकरण के दौरान ऐतिहासिक 'खड़े हनुमान मंदिर' का ऊपरी ढांचा हटाए जाने के बाद उपजा विवाद गहराता जा रहा है। आम श्रद्धालुओं, संत समाज, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के कड़े विरोध के बाद अब जिला प्रशासन ने अपना रुख स्पष्ट किया है। प्रशासन ने दो टूक कहा है कि श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और आस्था को ध्यान में रखे बिना प्रतिमा विस्थापन को लेकर कोई एकतरफा फैसला नहीं किया जाएगा। इसी क्रम में प्रशासन ने प्रतिमा की प्राचीनता और भूमिगत आधार की पड़ताल के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT इंदौर) के विशेषज्ञों की टीम से विशेष उपकरणों के जरिए वैज्ञानिक परीक्षण कराया है।

IIT इंदौर की टीम ने 2 घंटे तक की वैज्ञानिक जांच, विशेषज्ञ रिपोर्ट पर टिकी कार्रवाई

मंगलवार को IIT इंदौर के विशेषज्ञ इंजीनियरों की एक टीम ने खड़े हनुमान मंदिर परिसर में करीब दो घंटे तक आधुनिक रडार और संरचनात्मक सेंसर उपकरणों से सघन जांच की। टीम ने प्रतिमा की जमीन के भीतर गहराई, उसकी आधारशिला (फाउंडेशन) और आसपास की भूगर्भीय बनावट का डेटा एकत्र किया है। नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रतिमा के नीचे की संरचना कैसी है और क्या उसे बिना किसी क्षति के विस्थापित करना तकनीकी रूप से संभव भी है या नहीं। नगर निगम आयुक्त के अनुसार, विशेषज्ञों की आधिकारिक रिपोर्ट आने तक विस्थापन की समस्त कार्रवाई पूरी तरह स्थगित रहेगी।

1000 वर्ष प्राचीन और परमार कालीन बेसाल्ट पत्थर की प्रतिमा होने का दावा

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. रमण सोलंकी के अनुसार, खड़े हनुमानजी की यह दुर्लभ प्रतिमा लगभग 1000 वर्ष पुरानी हो सकती है। प्राचीन काल में विशाल पाषाण प्रतिमाओं को इंटरलॉकिंग तकनीक (बिना गारे-चूने के पत्थर जोड़कर) से स्थापित किया जाता था। उन्होंने बताया कि यह प्रतिमा मालवा क्षेत्र में पाए जाने वाले अत्यधिक कठोर बेसाल्ट पत्थर से तराशी गई है, जिसकी नक्काशी परमार वंश और राजा भोज कालीन स्थापत्य कला से मेल खाती है। सदियों से नियमित सिंदूर के लेप चढ़ने के कारण प्रतिमा की मूल बारीक भाव-भंगिमाएं ढकी हुई हैं, लेकिन इसका ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व अत्यंत उच्च है।

संतों का पैदल मार्च, कांग्रेस ने गाया रामधुन और वीएचपी ने की नए तीर्थ की मांग

मंदिर के संरक्षण को लेकर उज्जैन में व्यापक जनआंदोलन का माहौल है:

  • संत समाज: गोपाल मंदिर से खड़े हनुमान मंदिर तक संतों ने पैदल मार्च निकाला और सामूहिक महाआरती की। संतों ने कहा कि यह स्थान अनादि काल से जन-आस्था का केंद्र है, जिससे कोई छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी।

  • कांग्रेस का विरोध: तराना विधायक महेश परमार, पूर्व विधायक दिलीप गुर्जर और शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कंठाल से मंदिर तक रामधुन गाते हुए प्रदर्शन किया और हनुमान चालीसा का पाठ कर प्रशासन को चेतावनी दी।

  • विहिप और बजरंग दल: मालवा प्रांत के पदाधिकारियों ने महाकाल नीलकंठ द्वार से मार्च निकालकर प्रशासन से मांग की कि सड़क योजना में संशोधन कर खड़े हनुमान मंदिर को एक नए भव्य तीर्थ के रूप में विकसित किया जाए।

सोशल मीडिया पर 5 करोड़ तक पहुंची चर्चा, प्रशासन बोला- 'भ्रामक खबरों से बचें'

खड़े हनुमान मंदिर का मुद्दा अब स्थानीय स्तर से निकलकर सोशल मीडिया के जरिए राष्ट्रीय विमर्श का रूप ले चुका है। प्रख्यात भजन गायकों और कथावाचकों द्वारा वीडियो साझा किए जाने के बाद इस मुद्दे की सोशल मीडिया रीच 5 करोड़ (50 मिलियन) पार कर चुकी है। बढ़ते दबाव के बीच एसडीएम एल.एन. गर्ग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सिंहस्थ 2028 के विकास कार्यों के साथ-साथ उज्जैन की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की सुरक्षा भी प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इन अफवाहों को सिरे से खारिज किया कि प्रशासन ने प्रतिमा को हटाने का कोई हिंसक या मशीनी प्रयास किया है। उन्होंने दोहराया कि सभी पक्षों, संतों और नागरिकों के विश्वास के बिना कोई अगला कदम नहीं उठाया जाएगा।

Date & Time : 2026-09-10 11:33:52

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