
उज्जैन। उज्जैन जिले की तराना तहसील में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ग्राम पंचायत बोरदा मांडा के पंचायत सचिव दरबारसिंह राठौड़ को लोकायुक्त की टीम ने 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। इस मामले में रिश्वतखोरी में साथ देने वाले एक निजी ठेकेदार कमल बंजारा को भी सह-आरोपी बनाया गया है।
45 हजार की मांग, 15 हजार पहले ही ले चुका था आरोपी घटनाक्रम के अनुसार, ग्राम पंचायत बोरदा मांडा के सरपंच राजेश चतुर्वेदी ने 12 मार्च को लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी। सरपंच ने बताया कि उनके पंचायत क्षेत्र में हुए विभिन्न निर्माण कार्यों की राशि स्वीकृत करने (बिल पास करने) के एवज में पंचायत सचिव दरबारसिंह राठौड़ 45 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा है। इसमें से 15 हजार रुपये सचिव पहले ही ले चुका था और शेष 30 हजार रुपये के लिए दबाव बना रहा था।
कार में रिश्वत लेते ही घेराबंदी लोकायुक्त एसपी के निर्देश पर निरीक्षक दीपक शेजवार ने शिकायत का सत्यापन किया, जिसमें मामला सही पाया गया। इसके बाद जाल बिछाकर सरपंच को 30 हजार रुपये देकर भेजा गया। योजना के अनुसार, सचिव दरबारसिंह राठौड़ सरपंच की कार में बैठकर कायथा थाने के पास सड़क तक आया। जैसे ही उसने कार के भीतर रिश्वत की राशि लेकर अपने साथी ठेकेदार कमल बंजारा को थमाई, निगरानी कर रही लोकायुक्त टीम ने दोनों को रंगेहाथ दबोच लिया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज लोकायुक्त टीम के उप पुलिस अधीक्षक राजेश पाठक के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के दौरान आरोपियों के हाथ धुलवाए गए, जिससे रिश्वत के रूप में लिए गए रुपयों का रंग स्पष्ट हो गया। पुलिस ने रिश्वत की राशि जब्त कर आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।
लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, इस मामले की रिपोर्ट विभाग को भेजी जाएगी ताकि आरोपी सचिव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सके। टीम जल्द ही विवेचना पूरी कर विशेष न्यायालय में चालान पेश करेगी।
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