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उज्जैन में मानवता की अनूठी मिसाल: बेटे की कैंसर से मौत के बाद ससुर ने बहू को बेटी बनाकर किया कन्यादान, शादी पर खर्च किए 7 लाख


उज्जैन. मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले से समाज को नई दिशा दिखाने वाली और मानवीय संवेदनाओं से भरी एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। यहाँ एक रूढ़िवादी सोच को दरकिनार कर एक ससुर ने अपने दिवंगत बेटे की विधवा पत्नी (बहू) को बेटी का दर्जा दिया और पिता का फर्ज निभाते हुए उसका पुनर्विवाह (Remarriage) कराया। ससुर ने न सिर्फ खुद अपनी बहू का कन्यादान किया, बल्कि इस शादी का करीब 7 लाख रुपये का पूरा खर्च भी खुद उठाया। विदाई के समय जब बहू को बेटी बनाकर विदा किया गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।

शादी के 5 साल बाद कैंसर ने छीनी खुशियां

यह प्रेरणादायक कहानी उज्जैन के ग्राम जेथल की है। यहाँ रहने वाले दिनेश बैरागी के छोटे बेटे कपिल बैरागी का विवाह वर्ष 2018 में विदिशा की रहने वाली प्रियंका के साथ बड़े ही धूमधाम से हुआ था। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन शादी के तीन साल बाद यानी साल 2021 में कपिल के पैर में कैंसर (Bone Cancer) होने का पता चला। इस खबर ने हंसते-खेलते परिवार को झझोंर कर रख दिया। ससुर दिनेश बैरागी ने बेटे को बचाने के लिए महंगे अस्पतालों में करीब दो वर्षों तक जी-जान से इलाज कराया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद 6 जून 2023 को कपिल जिंदगी की जंग हार गया।

बहू के भविष्य के लिए सास-ससुर ने उठाया बड़ा कदम

पति की मृत्यु के बाद प्रियंका पूरी तरह टूट चुकी थी, लेकिन वह अपने ससुराल में ही रहकर सास-ससुर की सेवा कर रही थी। प्रियंका की कम उम्र और उसके अंधकारमय भविष्य को देख सास कैलाश बाई और ससुर दिनेश बैरागी का दिल पसीज गया। उन्होंने समाज के तानों और पुरानी परंपराओं की परवाह न करते हुए प्रियंका का जीवन फिर से संवारने का बड़ा फैसला लिया। उन्होंने प्रियंका को अपनी बहू नहीं, बल्कि बेटी माना और उसके लिए एक सुयोग्य वर की तलाश शुरू की।

पिता बन ससुर ने निभाया फर्ज:

दिनेश बैरागी ने प्रियंका के लिए एक अच्छा रिश्ता ढूंढा और हिंदू रीति-रिवाज से उसका विवाह तय किया। शादी समारोह में ससुर ने पिता की जगह बैठकर खुद प्रियंका का कन्यादान किया। उन्होंने बताया, "बेटा तो हमें छोड़कर चला गया, लेकिन इस बच्ची की पूरी जिंदगी आगे पड़ी थी। हम इसे इस तरह दुख में नहीं देख सकते थे। आज अपनी बेटी को विदा करके कलेजा तो भारी है, लेकिन इस बात का सुकून है कि उसका घर फिर से बस गया।"

इस अनोखी और संवेदनशील शादी की चर्चा अब पूरे मध्य प्रदेश में हो रही है। लोग दिनेश बैरागी और उनके परिवार की इस पहल की सराहना कर रहे हैं, जिसने साबित कर दिया कि रिश्तों की डोर सिर्फ खून से नहीं, बल्कि इंसानियत और अपनों के प्रति जिम्मेदारी से बंधी होती है।

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