
सिंगरौली जिले से प्रशासनिक लापरवाही का एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति को सरकारी कागजों में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वह न सिर्फ जिंदा है बल्कि अदालत के आदेश पर अपनी पत्नी को हर महीने ₹5,000 गुजारा भत्ता भी दे रहा है। हैरानी की बात यह है कि उसकी पत्नी पिछले 12 साल से विधवा पेंशन ले रही है।
मामला बैढ़न जनपद के करसोसा गांव का है। गांव निवासी चंद्रबली पटेल इन दिनों अपने गले में “साहब, मैं जिंदा हूं” लिखी तख्ती लटकाकर कलेक्टर और एसडीएम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, ताकि प्रशासन उन्हें जिंदा मान ले।
चंद्रबली ने बताया कि करीब 30 साल पहले उनकी शादी अंजोरिया से हुई थी। आपसी विवाद के चलते वर्ष 2014 में दोनों अलग हो गए और चंद्रबली ने दूसरी शादी कर ली। इसी दौरान अंजोरिया ने दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया, जिसके चलते चंद्रबली को 2024 में जेल जाना पड़ा।
आरोप है कि पति के जेल जाने के बाद अंजोरिया ने पंचायत स्तर पर मिलीभगत कर खुद को विधवा घोषित करा लिया और पेंशन स्वीकृत करा ली। वहीं, वर्ष 2018 में कोर्ट ने चंद्रबली को पहली पत्नी को हर महीने ₹5,000 गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया, जिसका वह आज भी पालन कर रहे हैं।
चंद्रबली ने बताया कि गुजारा भत्ता चुकाने के लिए उन्होंने अपनी जमीन बेचकर करीब ₹3.70 लाख जमा किए। इसी दौरान उन्हें पता चला कि उनकी पत्नी विधवा पेंशन भी ले रही है। वर्ष 2024 से अब तक वह पंचायत से लेकर कलेक्टर की जनसुनवाई तक कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
चंद्रबली और अंजोरिया की तीन संतानें हैं। उनका बड़ा बेटा राजकमल चाहता है कि मां वापस लौट आए या कम से कम बच्चों के साथ रहे, लेकिन अंजोरिया इसके लिए तैयार नहीं है।
मामले पर जिला पंचायत सीईओ जगदीश कुमार गोमे ने कहा कि जनपद पंचायत बैढ़न से जांच रिपोर्ट मांगी गई है। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होगी और गलत तरीके से ली गई पेंशन राशि की पूरी वसूली की जाएगी।
यह मामला सरकारी रिकॉर्ड की गंभीर खामियों और सिस्टम में मौजूद लापरवाही को उजागर करता है, जहां एक जिंदा इंसान को अपनी पहचान साबित करने के लिए दफ्तर-दर-दफ्तर भटकना पड़ रहा है।

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