
छतरपुर जिले अंतर्गत मातगुवां थाना क्षेत्र से धार्मिक आस्था पर चोट पहुंचाने वाली बड़ी वारदात सामने आई है। सागर-छतरपुर मुख्य मार्ग पर स्थित करीब 200 साल पुराने ऐतिहासिक ब्रह्मदेव मंदिर को अज्ञात चोरों ने अपना निशाना बनाया। सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात चोर मंदिर का ताला तोड़कर गर्भगृह में बाल स्वरूप में विराजे भगवान रामलला की बहुमूल्य अष्टधातु की मूर्ति समेत छोटी-बड़ी करीब 20 देव प्रतिमाएं समेटकर फरार हो गए।
मंगलवार सुबह जब स्थानीय पुजारी और श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे, तो मूर्तियां गायब देखकर उनके होश उड़ गए। देखते ही देखते मौके पर भारी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया।
स्थानीय ग्रामीणों और मंदिर समिति के अनुसार, ब्रह्मदेव मंदिर में बाल स्वरूप रामलला की अष्टधातु प्रतिमा करीब दो शताब्दियों (200 वर्ष) से स्थापित थी। यह प्रतिमा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र थी, बल्कि ऐतिहासिक व पुरातात्विक दृष्टिकोण से भी अत्यधिक बेशकीमती मानी जाती है।
चोरों ने योजनाबद्ध तरीके से रात के अंधेरे में धावा बोला और मुख्य प्रतिमा के साथ-साथ मंदिर परिसर में स्थापित अन्य देवी-देवताओं की लगभग 20 छोटी-बड़ी मूर्तियों को भी चुरा ले गए।
छतरपुर जिले में लगातार हो रही आपराधिक वारदातों से आमजन में रोष है और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मातगुवां क्षेत्र में पिछले दो दिनों के भीतर चोरी की यह दूसरी बड़ी घटना है। बेखौफ चोरों द्वारा लगातार धार्मिक स्थलों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाए जाने से पुलिस गश्त और सुरक्षा दावों की कलई खुलती नजर आ रही है।
घटना की सूचना मिलते ही मातगुवां थाना प्रभारी अंकुर चौबे पुलिस बल और फॉरेंसिक विशेषज्ञों के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। पुलिस टीम ने मंदिर परिसर का बारीकी से मुआयना कर फिंगरप्रिंट और अन्य भौतिक साक्ष्य एकत्र किए हैं।
थाना प्रभारी अंकुर चौबे के अनुसार, सागर-छतरपुर मार्ग और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। संदिग्ध व्यक्तियों की धरपकड़ के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और सीमावर्ती थाना क्षेत्रों में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही गिरोह का सुराग लगाकर प्राचीन मूर्तियों को सकुशल बरामद कर लिया जाएगा।
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