
बैतूल जिले में मोरखा स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा में 1.34 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस जांच के अनुसार, बैंक के असिस्टेंट मैनेजर लोकेश गुखे और पास ही कियोस्क सेंटर चलाने वाले एक नाबालिग ने मिलकर खाताधारकों के पैसों का गबन किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए अब तक कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
जांच में सामने आया कि नाबालिग कियोस्क पर पासबुक अपडेट कराने आने वाले स्थानीय ग्रामीणों को भली-भांति पहचानता था। असिस्टेंट मैनेजर ने अपनी आधिकारिक बैंक आईडी का दुरुपयोग करते हुए खाताधारकों के खातों से जुड़े रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदल दिए। इसके बाद नेट बैंकिंग के जरिए रकम विभिन्न खातों में भेजी गई। धोखाधड़ी की कुल राशि में से करीब 1.14 करोड़ रुपये गौरव सूर्यवंशी नामक टैक्सी ड्राइवर के खाते में ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा बाकी रकम असिस्टेंट मैनेजर, उसकी मां और नाबालिग के रिश्तेदारों के बैंक खातों में भेजी गई थी।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से करीब 10 लाख रुपये की मारुति कार, छह महंगे मोबाइल फोन, 8.28 लाख रुपये का सोना और 1.40 लाख रुपये की चांदी सहित कुल 22.33 लाख रुपये की संपत्ति बरामद की है। यह फर्जीवाड़ा जनवरी माह से चल रहा था, जिसका खुलासा 21 अक्टूबर को तब हुआ जब एक सेवानिवृत्त शिक्षक गेंदाराम सोनी ने अपने खाते से 7 लाख रुपये कटने की पहली औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अब तक छह अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं।
जांच टीम इस गंभीर पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या जीवित खाताधारकों को दस्तावेजों में मृत दिखाकर उनकी सावधि जमा (एफडी) की रकम निकालने का प्रयास किया गया था। संदेह है कि छह जीवित खाताधारकों के नाम पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किए गए थे। इसके साथ ही बैंक की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की भी पड़ताल की जा रही है कि एक कर्मचारी के स्तर पर बिना उच्च स्तरीय सत्यापन के मोबाइल नंबर कैसे बदले गए।
Leave A Reviews