
नई दिल्ली। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने लोकतंत्र के पर्व में हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की है। जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 60 (सी) के तहत आयोग ने 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और मतदाता सूची में चिह्नित दिव्यांग जनों को घर से ही मतदान करने की वैकल्पिक सुविधा प्रदान की है। इसके अलावा, चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मियों और सेवा मतदाताओं (Service Voters) के लिए भी डाक मतपत्र की विशेष व्यवस्था लागू की गई है।
आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, घर से मतदान करने के पात्र मतदाताओं को फॉर्म 12D भरकर आवेदन करना होगा। यह आवेदन चुनाव की आधिकारिक घोषणा के पांच दिनों के भीतर अपने संबंधित बीएलओ (BLO) के माध्यम से निर्वाचन अधिकारी को जमा करना अनिवार्य है। आवेदन स्वीकार होने के बाद, निर्वाचन अधिकारी द्वारा गठित एक विशेष मतदान टीम तय कार्यक्रम के अनुसार मतदाता के घर पहुंचेगी और पूरी गोपनीयता के साथ वोट एकत्र करेगी। इस पूरी प्रक्रिया का शेड्यूल उम्मीदवारों के साथ भी साझा किया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
निर्वाचन आयोग ने उन मतदाताओं का भी ध्यान रखा है जो मतदान के दिन आवश्यक सेवाओं में तैनात रहने के कारण पोलिंग बूथ तक नहीं पहुँच पाते। इसमें दमकल, स्वास्थ्य विभाग, बिजली, यातायात, एंबुलेंस, नागरिक उड्डयन और सरकारी सड़क परिवहन सेवाओं के कर्मचारी शामिल हैं। आयोग ने इस बार अधिकृत मीडिया कर्मियों को भी 'अनिवार्य सेवाओं' की श्रेणी में रखते हुए डाक मतपत्र की सुविधा दी है। ये सभी मतदाता अपने विभाग के नोडल अधिकारी के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। वहीं, चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी सुविधा केंद्रों (Facilitation Centres) पर अपना वोट गोपनीय तरीके से जमा कर पाएंगे।
सीमा पर तैनात सैनिकों और अन्य सेवा मतदाताओं के लिए आयोग ने इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट सिस्टम (ETPBS) को अपनाया है। इसके तहत उम्मीदवारों की सूची फाइनल होते ही डाक मतपत्र इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेज दिए जाएंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इसके लिए मतदाताओं को कोई डाक शुल्क नहीं देना होगा। सभी डाक मतपत्रों को 4 मई 2026 को होने वाली मतगणना के दिन सुबह 8 बजे तक संबंधित निर्वाचन अधिकारी के पास पहुँचना अनिवार्य है।
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