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इंदौर से शुरू होगा ग्रीन ट्रांसपोर्ट का नया दौर: भोपाल, उज्जैन समेत 6 रूटों पर दौड़ेंगी 26 इलेक्ट्रिक बसें; यात्रियों को मिलेगी लाइव ट्रैकिंग और पैनिक बटन की सुविधा


इंदौर. मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर से जल्द ही इंटरसिटी पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन का एक आधुनिक और हाईटेक अध्याय शुरू होने जा रहा है। राज्य सरकार की 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' के तहत इंदौर से छह प्रमुख रूटों पर 26 अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसों (E-Buses) का संचालन किया जाएगा। अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (AICTCL) ने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल सफर की सौगात देना है।

इन 6 रूटों पर मिलेगी ई-बस सेवा शुरुआती चरण में इंदौर से कनेक्ट होने वाले इन महत्वपूर्ण रूटों को शामिल किया गया है:

  1. इंदौर से भोपाल

  2. इंदौर से उज्जैन

  3. इंदौर से खंडवा

  4. इंदौर से खरगोन

  5. इंदौर से मांडू

  6. इंदौर से सेंधवा

10 साल का होगा अनुबंध, 22 जून तक मंगाए टेंडर पहले चरण में 12 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक इंजन वाली 26 बसों को अनुबंध के आधार पर चलाया जाएगा। इसके लिए AICTCL ने 22 जून तक टेंडर आमंत्रित किए हैं। 23 जून को टेक्निकल बिड खोली जाएगी, जिसके बाद सफल ऑपरेटर और AICTCL के बीच 10 वर्षों के लिए संचालन का अनुबंध (Contract) किया जाएगा। आपसी सहमति से इसे 2 आगे वर्षों के लिए बढ़ाया भी जा सकेगा। ऑपरेटर के पास न्यूनतम 3 वर्ष का अनुभव और 10 करोड़ रुपये का टर्नओवर होना अनिवार्य है।

सरकार देगी 40% अनुदान (Subsidy) इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ऑपरेटरों को वित्तीय मदद भी दे रही है। अनुबंध करने वाले ऑपरेटर को नई ई-बस खरीदने पर बस की कुल कीमत का 40 प्रतिशत या अधिकतम 1.50 करोड़ रुपये (जो भी कम हो) का अनुदान चार चरणों में दिया जाएगा। हालांकि, रूट पर और अंतिम पड़ाव पर चार्जिंग स्टेशन और डिपो की व्यवस्था खुद ऑपरेटर को ही करनी होगी।

हाईटेक सुरक्षा फीचर्स: रियल टाइम ट्रैकिंग और सीसीटीवी से लैस होंगी बसें

सफर को बेहद सुरक्षित और स्मार्ट बनाने के लिए इन बसों में आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है:

  • लाइव ट्रैकिंग: बसों में AIS-140 मानकों के तहत GPS आधारित व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) लगेगी, जो सीधे सेंट्रल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जुड़ी रहेगी। इससे यात्री और विभाग रियल टाइम में बस की लोकेशन देख सकेंगे।

  • पैनिक बटन: आपातकालीन स्थिति के लिए हर बस में पैनिक बटन दिए जाएंगे, जिसे दबाते ही सीधे कंट्रोल रूम को अलर्ट जाएगा।

  • CCTV और डिस्प्ले: यात्री क्षेत्र और ड्राइवर केबिन की निगरानी के लिए 2 सीसीटीवी कैमरे होंगे। ड्राइवर के केबिन में 7 इंच की डिस्प्ले स्क्रीन होगी, जिससे वह पीछे की गतिविधियों पर नजर रख सकेगा।

नियमों की अनदेखी पर लगेगा भारी जुर्माना

यात्रियों की सुविधा और समय की पाबंदी सुनिश्चित करने के लिए एआईसीटीसीएल ने कड़े जुर्माने के प्रावधान भी तय किए हैं:

उल्लंघन / लापरवाही जुर्माने की राशि
बस की लाइव ट्रैकिंग चालू न होने पर 1,000 प्रति दिन
समय सारणी (पंक्चुअलिटी) का पालन न करने पर 500 प्रति दिन
बस उपलब्ध न कराने या ट्रिप मिस करने पर 1,000 प्रति बस/दिन
चार्जिंग की व्यवस्था उपलब्ध न होने पर 1,000 प्रति दिन
चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस न मिलने पर 500
पहला हादसा होने पर 15,000 (प्लस वैधानिक जिम्मेदारी)
प्रति 1000 ट्रिप पर 2 से अधिक शिकायत मिलने पर 500 (प्रति अतिरिक्त शिकायत)

ऑपरेटरों के सामने लागत की चुनौती भले ही सरकार 40% की सब्सिडी दे रही है, लेकिन बस ऑपरेटरों का कहना है कि एक इलेक्ट्रिक बस की कीमत करीब 1.25 करोड़ रुपये है। पहले से ही इन रूटों पर कई बसें चल रही हैं, ऐसे में भारी-भरकम वित्तीय निवेश और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी ऑपरेटर पर होने के कारण लागत निकालना शुरुआती दिनों में एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

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