
यरुशलम/दुबई/इस्लामाबाद. दुनियाभर में आज ईद-उल-फितर मनाई जा रही है, लेकिन मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध ने जश्न के माहौल को मातम और सन्नाटे में बदल दिया है. अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही 'डायरेक्ट वॉर' के 22वें दिन, इतिहास में पहली बार ऐसी पाबंदियां देखी जा रही हैं जो दशकों से नहीं लगी थीं.
अल-अक्सा मस्जिद में सन्नाटा: इजरायली सुरक्षा बलों ने सुरक्षा कारणों और हवाई हमलों के खतरे का हवाला देते हुए यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद को नमाज के लिए पूरी तरह बंद कर दिया है. 1967 के छह-दिवसीय युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब ईद पर यहाँ ताला लटका है. नमाज पढ़ने आए हजारों फिलिस्तीनियों को ओल्ड सिटी की गलियों और बैरिकेड्स के बाहर ही नमाज अदा करनी पड़ी.
ईरान में मातम का माहौल: तेहरान और अन्य ईरानी शहरों में ईद के बाजार पूरी तरह खाली पड़े हैं. इजरायली हवाई हमलों और हाल ही में सर्वोच्च नेता की मौत के बाद देश में राष्ट्रीय शोक और डर का माहौल है. लोग घरों से बाहर निकलने के बजाय निजी तौर पर प्रार्थनाएं कर रहे हैं.
खाड़ी देशों में सुरक्षा अलर्ट: UAE, कतर और कुवैत जैसे देशों ने खुले मैदानों (ईदगाहों) में नमाज पढ़ने पर पाबंदी लगा दी है. प्रशासन का कहना है कि ईरान की ओर से होने वाले मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे को देखते हुए भीड़ को एक जगह जमा होने से रोकना जरूरी है. नमाज केवल प्रमुख मस्जिदों के भीतर पढ़ने की अनुमति दी गई है.
पाक-अफगान सीमा पर 'ईद सीजफायर': एक दुर्लभ राहत की खबर में, सऊदी अरब और तुर्किए की मध्यस्थता के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान 5 दिनों के युद्धविराम पर सहमत हुए हैं. यह सीजफायर 24 मार्च तक लागू रहेगा, ताकि लोग शांति से त्योहार मना सकें. हालांकि, पाकिस्तान ने चेतावनी दी है कि किसी भी आतंकी हमले की स्थिति में 'ऑपरेशन' तुरंत बहाल कर दिया जाएगा.
Leave A Reviews