
बैतूल जिले से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां पीएम श्री हायर सेकेंडरी स्कूल पाढर के छात्रावास में रहने वाले 33 छात्र गुरुवार को अपनी समस्याओं को लेकर 18 किलोमीटर का सफर पैदल तय करके कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंच गए। कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं के ये सभी छात्र छात्रावास अधीक्षक के खिलाफ बेहद आक्रोशित थे और उन्हें तुरंत पद से हटाने की मांग पर अड़े हुए थे। इस के सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
जब इतनी बड़ी संख्या में छात्र पैदल चलकर कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे, तो प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत स्थिति को संभालने की कोशिश की। इस दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में काफी देर तक हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला:
अधिकारियों की समझाइश रही बेअसर: परिसर में मौजूद एसडीएम और तहसीलदार ने तुरंत छात्रों से संवाद करने का प्रयास किया। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने करीब एक घंटे तक जमीन पर बैठकर छात्रों को समझाने और उनकी मुख्य समस्याएं जानने की कोशिश की, लेकिन छात्रों ने अधिकारियों को कुछ भी बताने से साफ इनकार कर दिया।
प्रतिनिधियों को भी नहीं दी जानकारी: इस दौरान मौके पर पहुंचे जिला पंचायत उपाध्यक्ष हंसराज धुर्वे ने भी छात्रों से चर्चा कर मामला शांत करने की कोशिश की, परंतु छात्रों ने उन्हें भी हॉस्टल की अंदरूनी स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। छात्रों का स्पष्ट कहना था कि वे अपनी आपबीती सिर्फ और सिर्फ जिला कलेक्टर के सामने ही साझा करेंगे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत पाढर छात्रावास के अधीक्षक सिरसाम सिंह परते को कलेक्ट्रेट तलब किया, लेकिन छात्र अधीक्षक के सामने भी शांत रहे। इसके बाद जिला कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवने खुद मौके पर पहुंचे। वे सभी बच्चों को अपने निजी चैंबर में ले गए, जहां छात्रों ने रो-रोकर अधीक्षक के व्यवहार और प्रताड़ना का पूरा सच बयां किया।
कलेक्टर से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए छात्र श्याम मर्सकोले ने अधीक्षक के खिलाफ कई गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए। छात्रों के अनुसार:
शराब पीकर मारपीट: हॉस्टल अधीक्षक अक्सर शराब के नशे में धुत होकर छात्रों के साथ बेरहमी से मारपीट करते हैं।
घरेलू काम कराना: छात्रों से हॉस्टल के काम के अलावा अधीक्षक अपने निजी गंदे कपड़े भी धुलवाते हैं।
अवैध वसूली: यदि कोई छात्र किसी कारणवश छात्रावास से कुछ समय के लिए अनुपस्थित रहता है, तो उससे दोबारा आने पर पैसों की मांग की जाती है। साथ ही लेट आने पर रुपए और मुर्गे (चिकन) की डिमांड की जाती है। यहां तक कि बीमार होने पर इलाज के नाम पर भी छात्रों से अवैध तरीके से पैसे वसूले जाते हैं।
इस पूरे सामूहिक विरोध की शुरुआत दो दिन पहले एक मामूली सी दिखने वाली घटना से हुई थी। हॉस्टल में रहने वाला सहवाग नाम का एक छात्र खेलने के लिए एक नई बॉल लेकर आया था, जो हॉस्टल परिसर से गुम हो गई थी। बुधवार को छात्रों ने वह गेंद अधीक्षक के बच्चों के पास देखी। जब छात्रों ने अपनी गेंद वापस मांगी, तो उन्हें एक पुरानी और टूटी हुई गेंद थमा दी गई। छात्रों द्वारा इसका विरोध करने पर अधीक्षक ने छात्र सहवाग की बेरहमी से पिटाई कर दी। इस घटना से नाराज होकर सभी छात्र एकजुट हुए और सुबह ही हॉस्टल छोड़कर 18 किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंच गए।
इस बैतूल हॉस्टल मामला में छात्रों के कड़े रुख को देखते हुए कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवने ने तुरंत बड़ा फैसला लिया। छात्रों ने कलेक्टर के सामने दो टूक कह दिया था कि "अब हॉस्टल में या तो अधीक्षक रहेंगे या हम रहेंगे, अगर उन्हें नहीं हटाया गया तो हम अपने घर लौट जाएंगे।"
मामले को बिगड़ता देख कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से अधीक्षक सिरसाम सिंह परते को पाढर हॉस्टल से हटा दिया है। इसके साथ ही पूरे मामले की बारीकी से जांच करने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है, जिसे 3 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
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