
मैहर। 23 सितंबर को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना होने जा रही है। शासकीय जीवाजी वेधशाला उज्जैन द्वारा जारी पत्र क्रमांक 155 दिनांक 21.09.2026 के अनुसार 23 सितंबर 2026 को शरद विषुव (Sharad Vishuvat) की घटना होगी।
इस दिन, दिन और रात की अवधि बराबर-बराबर यानी 12-12 घंटे की होगी। इसे शरद सम्पात भी कहा जाता है।

- वेधशाला के अनुसार पृथ्वी की परिक्रमा के कारण सूर्य वर्ष में दो बार विषुवत रेखा पर लंबवत होता है। 23 सितंबर को सूर्य विषुवत रेखा पर लंबवत होगा। - इस दिन सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में प्रवेश करेगा और सायन तुला राशि में होगा।
- सूर्य के दक्षिणी गोलार्ध में जाने से उत्तरी गोलार्ध में अब दिन धीरे-धीरे छोटे और रातें बड़ी होने लगेंगी। यह क्रम 22 दिसंबर तक चलेगा।
- 22 दिसंबर को साल का सबसे छोटा दिन और सबसे बड़ी रात होगी।
- 24 सितंबर से उत्तरी गोलार्ध में सूर्य की किरणों की तीव्रता कम होने लगेगी, जिसके साथ ही शरद ऋतु का प्रारंभ माना जाएगा।
जीवाजी वेधशाला उज्जैन में 23 सितंबर को सूर्य की स्थिति, गति और नक्षत्रीय समय को प्रत्यक्ष दिखाया जाएगा। यंत्रों के माध्यम से सूर्य का विषुवत रेखा पर गमन देखा जा सकेगा। वेधशाला ने सभी स्कूल-कॉलेजों और आम नागरिकों से इस खगोलीय घटना को देखने और विद्यार्थियों तक जानकारी पहुंचाने की अपील की है।
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