
ग्वालियर। मध्य प्रदेश सरकार ने आयुष्मान भारत योजना से संबद्ध निजी चिकित्सालयों में उपचार की गुणवत्ता और स्वास्थ्य मानकों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के चार प्रमुख महानगरों—ग्वालियर, भोपाल, इंदौर और जबलपुर के अनुबंधित निजी अस्पतालों में मेडिसिन पैकेज के अंतर्गत मरीजों का उपचार करने के लिए एनएबीएच (नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स) प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया गया है।
यह नया नियम 1 अक्टूबर से प्रभावी होने जा रहा है। इस कठोर शर्त के लागू होने से अकेले ग्वालियर जिले के करीब 79 निजी अस्पताल योजना के मेडिसिन पैकेज के दायरे से बाहर हो जाएंगे, जिससे स्वास्थ्य जगत में हलचल मच गई है।
सरकार के इस फैसले से निजी नर्सिंग होम और अस्पताल संचालकों में गहरी चिंता व्याप्त है। संचालकों का तर्क है कि एनएबीएच एक्रीडिटेशन प्राप्त करने की प्रक्रिया लंबी, जटिल और वित्तीय रूप से खर्चीली है, जिसे इतने कम समय में पूरा करना अधिकांश छोटे व मध्यम अस्पतालों के लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
नर्सिंग होम एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश रायजादा ने बताया कि:
निजी अस्पतालों से जुड़े संगठनों की 27 सितंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।
बैठक में सरकार के इस फरमान के खिलाफ आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
संगठन सरकार के समक्ष अपनी व्यावहारिक कठिनाइयों को रखते हुए एनएबीएच मानक पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय-सीमा (रियायत) देने की मांग करेगा।
नियमों की सख्ती को देखते हुए ऐसे निजी अस्पतालों ने त्वरित कदम उठाने शुरू कर दिए हैं, जहां आयुष्मान कार्डधारक मरीजों की ओपीडी और आईपीडी संख्या अधिक रहती है। कई बड़े चिकित्सालयों ने प्रारंभिक स्तर पर 'एंट्री लेवल एनएबीएच' प्रमाणन की औपचारिकताएं और दस्तावेज संधारण का काम तेज कर दिया है, ताकि 1 अक्टूबर के बाद भी उनके यहां मेडिसिन पैकेज के तहत भर्ती और क्लेम की प्रक्रिया बाधित न हो।
1 अक्टूबर से जो अस्पताल एनएबीएच की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं कर पाएंगे, वे आयुष्मान योजना के मेडिसिन पैकेज के तहत भर्ती मरीजों का कैशलेस उपचार नहीं कर सकेंगे।
इस व्यवस्था का सीधा प्रभाव मरीजों और स्वास्थ्य तंत्र पर इस प्रकार पड़ेगा:
मरीजों को होगी परेशानी: संबंधित 79 अस्पतालों में इलाज करा रहे या पहुंचने वाले मरीजों को मेडिसिन पैकेज का लाभ लेने के लिए अन्य प्रमाणित अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा।
बढ़ेगा दबाव: जिन चुनिंदा अस्पतालों के पास एनएबीएच प्रमाणपत्र मौजूद है, वहां अचानक मरीजों की भारी भीड़ और बिस्तरों (बेड्स) की कमी का संकट खड़ा हो सकता है।
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