
बालाघाट। जिले के बिरसा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले जत्ताटोला गांव में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब आबादी वाले इलाके के पास एक खूंखार तेंदुआ घुस आया। तेंदुए के गांव में घुसने की खबर आग की तरह फैल गई, जिसके बाद मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। इस दौरान तेंदुए ने खुद को घिरा देख एक स्थानीय शिक्षक पर जानलेवा हमला कर दिया। वन विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने करीब 4 से 5 घंटे तक चले बेहद कड़े और सूझबूझ भरे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आखिरकार तेंदुए को सुरक्षित रूप से वापस घने जंगल की ओर खदेड़ने में सफलता हासिल की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह ग्रामीणों ने गांव के पास ही एक खेत में तेंदुए को आराम करते हुए देखा। रिहायशी इलाके के इतने करीब वन्यजीव की मौजूदगी से पूरे गांव में दहशत फैल गई। डर और सुरक्षा के मद्देनजर सैकड़ों ग्रामीण हाथों में लाठियां और डंडे लेकर तेंदुए को खदेड़ने के लिए खेतों की ओर बढ़ गए। इसी बीच, तेंदुए को भगाने की कोशिश कर रहे स्थानीय शिक्षक सौरभ शर्मा पर तेंदुए ने अचानक झपट्टा मार दिया। तेंदुए के इस औचक हमले में शिक्षक सौरभ शर्मा के शरीर पर नाखूनों और दांतों के गहरे घाव आए हैं। घायल शिक्षक को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां फिलहाल उनका इलाज जारी है और उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।
खेत में तेंदुए और शिक्षक पर हमले की सूचना मिलते ही उत्तर सामान्य वनमंडल के बिरसा-दमोह परिक्षेत्र अधिकारी सौरभ शरणागत अपने पूरे अमले के साथ फौरन जत्ताटोला गांव पहुंचे। हालांकि, तब तक वहां स्थिति काफी तनावपूर्ण हो चुकी थी और तमाशबीनों व डरे हुए ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा थी। परिक्षेत्र अधिकारी और वनकर्मियों ने ग्रामीणों को तेंदुए के संभावित ठिकाने से पीछे हटाने की काफी कोशिश की, लेकिन लोग लाठियां लेकर लगातार आगे बढ़ते रहे। भीड़ के इस रवैये से तेंदुए के और हिंसक होने का खतरा बढ़ गया था। इसके बाद वन विभाग ने तुरंत बिरसा थाना पुलिस को इसकी सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने मोर्चा संभाला और लाठीधारी ग्रामीणों को खदेड़कर तेंदुए के छिपने वाले स्थल से काफी दूर किया।
परिक्षेत्र अधिकारी सौरभ शरणागत ने रेस्क्यू ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि खेत से भागने के बाद तेंदुआ गांव के ही एक सुनसान कमरे में जाकर छिप गया था। वन्यजीव को बिना कोई नुकसान पहुंचाए सुरक्षित बाहर निकालने के लिए वन विभाग ने एक विशेष रणनीति अपनाई। टीम ने पटाखे फोड़कर और वन विभाग के वाहनों के सायरन व शोर का उपयोग करके तेंदुए को कमरे से बाहर निकाला और धीरे-धीरे उसे प्राकृतिक आवास (जंगल) की तरफ बढ़ने पर मजबूर किया। यह पूरा रेस्क्यू ऑपरेशन लगभग 5 घंटे तक चला। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से रात के समय इस इलाके में तेंदुए की हलचल लगातार देखी जा रही थी।
वन विभाग ने राहत की सांस लेते हुए बताया कि तेंदुए को फिलहाल आबादी वाले क्षेत्र से दूर घने जंगलों में सुरक्षित खदेड़ दिया गया है। हालांकि, एहतियात के तौर पर वन्यप्राणी की दोबारा वापसी को रोकने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरे वन अमले को प्रभावित क्षेत्र में रात की गश्त (पेट्रोलिंग) पर लगा दिया गया है। इसके साथ ही आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पूरे इलाके की ड्रोन कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने जत्ताटोला सहित आसपास के सभी ग्रामीणों को पूरी सावधानी बरतने, रात के समय अकेले बाहर न निकलने और खेतों की तरफ न जाने की सख्त सलाह दी है।
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