
मंडला जिले में हर घर तक पानी पहुँचाने और पेयजल योजनाओं पर हजारों करोड़ रुपए पानी की तरह बहाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ग्रामीण अंचलों में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। जिला मुख्यालय में मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान यह दर्द उस समय छलक पड़ा, जब विभिन्न विकासखंडों और दूर-दराज के गाँवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएँ कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुँचीं। पानी की खाली बाल्टियाँ और डब्बे लेकर पहुँचीं इन महिलाओं ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी व्यथा सुनाते हुए व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। ग्रामीणों का साफ आरोप है कि कागजों पर दौड़ रहीं नल-जल योजनाएँ धरातल पर पूरी तरह ठप हैं, जिसके कारण उन्हें चिलचिलाती धूप में मीलों दूर से पानी ढोने को मजबूर होना पड़ रहा है।
जनसुनवाई में पहुँचीं ग्राम खुड़िया की महिलाओं ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि उनके गाँव में पानी की आपूर्ति पिछले कई दिनों से पूरी तरह ठप पड़ी है, जिससे दैनिक कार्य करना भी दूभर हो गया है। वहीं, मछरिया गाँव से आई महिलाओं ने जो हकीकत बयां की, उसने प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी। महिलाओं ने शिकायत की कि उनका पूरा गाँव अपनी प्यास बुझाने के लिए केवल एक ही कुएं पर निर्भर है। विडंबना यह है कि पानी का कोई दूसरा साधन न होने के कारण उसी एक कुएं पर इंसान और बेजुबान जानवर दोनों साथ-साथ पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है। इसी तरह, मोहगांव ब्लॉक के सुड़गांव की महिलाओं ने बताया कि नल-जल योजना के ढाँचे तो खड़े कर दिए गए हैं, लेकिन घरों तक पानी नहीं पहुँच रहा है। इसके चलते महिलाओं को हर रोज कई किलोमीटर का लंबा और पथरीला सफर तय कर पानी लाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के इस आक्रोश और पेयजल संकट पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के कार्यपालन यंत्री (EE) मनोज भास्कर ने विभागीय पक्ष रखते हुए सफाई दी है। उन्होंने बताया कि खुड़िया गाँव में हाल ही में हुए सड़क निर्माण कार्य के दौरान भारी मशीनों के चलने से मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसे जल्द से जल्द सुधरवाने के निर्देश दे दिए गए हैं। वहीं, मछरिया गाँव के बदतर हालातों के संबंध में उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत की पानी सप्लाई करने वाली मोटर खराब होने की वजह से यह गंभीर समस्या खड़ी हुई है। इस संबंध में पंचायत समन्वयकों से बात की गई है और मोटर को जल्द ठीक कराया जा रहा है। विभाग का मानना है कि ये तकनीकी कमियाँ हैं, जिनकी वजह से कुछ क्षेत्रों में अस्थायी रूप से जल आपूर्ति बाधित हुई है।
हजारों करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी मजरों-टोलों में बने इस भीषण जल संकट के सवाल पर पीएचई विभाग के ईई मनोज भास्कर ने अपना बचाव करते हुए एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि भले ही कुछ जगहों पर शिकायतें आ रही हों, लेकिन इन्हीं बड़ी पेयजल योजनाओं की बदौलत आज मंडला जिले के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से में सफलतापूर्वक पानी पहुँचाया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने यह बात भी स्वीकार की कि भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कुछ सुदूर मजरे और टोले (छोटे ग्रामीण इलाके) अभी भी मुख्य योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं, जहाँ जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नए सिरे से प्रयास किए जा रहे हैं। जनसुनवाई में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने परेशान होकर पहुँचे ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि सभी खराब और बंद पड़ी जल प्रणालियों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द दुरुस्त कर दिया जाएगा।
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