
उमरिया। जिले में रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं की कटाई पूरी होने के बाद खेतों में पराली (नरवाई) जलाने की विनाशकारी घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों में रात के सन्नाटे में खेतों से उठती आग की गगनचुंबी लपटें दूर-दूर तक दिखाई दे रही हैं। सबसे डरावनी स्थिति नेशनल हाईवे-43 (NH-43) के आसपास के खेतों की है, जहाँ आग की लपटें और उससे निकलने वाला घना धुआँ सीधे मुख्य मार्ग तक पहुँच रहा है। इसके कारण राजमार्ग पर दृश्यता (विजिबिलिटी) बेहद कम हो गई है, जिससे भारी वाहनों की टक्कर और भीषण सड़क दुर्घटनाओं की आशंका ने स्थानीय प्रशासन और राहगीरों की चिंता बढ़ा दी है।
दरअसल, किसान गेहूं की फसल को कंबाइन हार्वेस्टर से कटवाने के बाद बचे हुए डंठल और भूसे को जल्द से जल्द ठिकाने लगाने के लिए शार्टकट रास्ता अपना रहे हैं। वे अगली फसल की तैयारी के नाम पर खेतों में सीधे आग लगा देते हैं। कृषि वैज्ञानिकों और भूमि विशेषज्ञों के अनुसार, पराली जलाने की यह प्रथा बेहद नुकसानदेह है। इससे न केवल वातावरण प्रदूषित होता है, बल्कि अत्यधिक गर्मी के कारण मिट्टी में मौजूद मित्र कीट, केंचुए और आवश्यक सूक्ष्म जीवाणु जलकर नष्ट हो जाते हैं। नतीजा यह होता है कि भूमि की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति और उपजाऊ क्षमता धीरे-धीरे पूरी तरह समाप्त हो जाती है।
इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कृषि विभाग के अधिकारी आर.एन. सिंह परिहार ने बताया कि अब प्रशासन पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक की मदद ले रहा है। सेटेलाइट मैपिंग के जरिए उन खेतों और उनके स्वामियों की सटीक लोकेशन और डेटा वास्तविक समय (रियल टाइम) में जुटाया जा रहा है, जहाँ भी आग लगाई जा रही है। इस आधुनिक निगरानी के आधार पर विभाग अब तक जिले भर में नियमों का उल्लंघन करने वाले लापरवाह किसानों के खिलाफ 47 से अधिक कानूनी प्रकरण दर्ज कर चुका है। इसके साथ ही, कृषि विभाग की टीमें लगातार ग्रामीण इलाकों का दौरा कर किसानों को पराली न जलाने और इसके सुरक्षित निस्तारण जैसे कि 'पूसा डीकंपोजर' या रीपर तकनीक अपनाने के लिए जागरूक कर रही हैं।
प्रशासनिक स्तर पर केवल कृषि विभाग ही नहीं, बल्कि राजस्व विभाग भी इस मामले में पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। राजस्व अधिकारियों द्वारा सैटेलाइट रिपोर्ट के आधार पर चिन्हित किए गए खेतों का भौतिक सत्यापन कर संबंधित भू-स्वामियों से मौके पर ही भारी जुर्माना वसूला जा रहा है। जिला प्रशासन ने सख्त लहजे में किसानों से एक बार फिर भावुक और अनुशासनात्मक अपील की है कि वे अपनी ही जमीनों को बंजर होने से बचाएं और खेतों में आग लगाने की इस आत्मघाती प्रवृत्ति से दूर रहें, ताकि हमारे साझा पर्यावरण और धरती माता की उपजाऊ शक्ति दोनों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।
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