
बालाघाट। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित बालाघाट चावल घोटाला मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे के भतीजे अविनाश कावरे और गोपाल ठाकुर को गिरफ्तार किया है। दोनों को शुक्रवार देर शाम हिरासत में लेने के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। एसआईटी अब मामले में अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, अविनाश कावरे और गोपाल ठाकुर एक राइस मिल में साझेदार (पार्टनर) बताए जा रहे हैं। एसआईटी इस बात की जांच कर रही है कि कथित चावल हेराफेरी में उनकी क्या भूमिका रही और क्या वे पूरे नेटवर्क का हिस्सा थे।
जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में कई अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

बालाघाट चावल घोटाले का खुलासा होने के बाद मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी। जांच के दौरान अब तक 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और सभी को गिरफ्तार किया जा चुका है।
एसआईटी लगातार दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और संबंधित राइस मिलों की गतिविधियों की जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

यह मामला 3 जून को वारासिवनी क्षेत्र से सामने आया था। जांच में आरोप है कि 5,000 मीट्रिक टन से अधिक चावल की हेराफेरी की गई और इसकी खपत छिंदवाड़ा के बोरगांव स्थित एथेनॉल प्लांट सहित अन्य स्थानों पर की गई।
एसआईटी इस पूरे सप्लाई चेन और कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है।

मामले को लेकर पहले 1,100 करोड़ रुपये के घोटाले की चर्चाएं सामने आई थीं। हालांकि, बालाघाट के पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया था कि 1,100 करोड़ रुपये के घोटाले की खबरें भ्रामक हैं। उनके अनुसार, अब तक की जांच के आधार पर मामला करीब 500 करोड़ रुपये से जुड़ा है।
जांच अभी जारी है और अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घोटाले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
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