
बालाघाट. मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से एक बेहद मर्मस्पर्शी, झकझोर देने वाली और हृदयविदारक घटना सामने आई है. जिले के ग्रामीण थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले शांत पेंडरई गांव में एक युवा भाई ने अपनी ही जीवनलीला समाप्त कर ली. यह दुखद घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूर्णीय क्षति है, बल्कि इसने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है. इस মর্মান্তिक हादसे के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और हर कोई इस अनहोनी पर विश्वास नहीं कर पा रहा है.
कौन था मृतक और क्या थे पारिवारिक हालात?
प्राप्त विस्तृत जानकारी के अनुसार, इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में जान गंवाने वाले युवक की पहचान गोपाल मोहारे (25 वर्ष), पुत्र मदनलाल मोहारे के रूप में हुई है. गोपाल अपने परिवार का इकलौता चिराग था; वह दो बहनों (लता और करुणा) का अकेला भाई था. घर की जिम्मेदारी संभालते हुए वह गांव में रहकर पूरी ईमानदारी से खेती-किसानी का कार्य करता था.
घटना के वक्त घर के हालात कुछ ऐसे थे कि गोपाल अकेला था. उसकी माताजी कुछ दिन पहले अपनी बड़ी बेटी के यहां नागपुर गई हुई थीं, जिसके चलते घर पर केवल गोपाल ही मौजूद था. इसी सूनेपन और अकेलेपन के बीच यह खौफनाक घटना घटित हो गई.
रात के सन्नाटे में हुई घटनाओं का पूरा घटनाक्रम
गुरुवार की देर रात पेंडरई गांव में जो कुछ भी हुआ, वह किसी डरावने सपने जैसा था. पुलिस और परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम कुछ इस प्रकार आगे बढ़ा:
बहन को पहला फोन और चेतावनी: गुरुवार की रात को गोपाल ने अचानक अपनी बड़ी बहन लता को फोन लगाया और बातचीत के दौरान यह कहा कि वह फांसी लगाने जा रहा है. भाई के मुंह से ऐसी बात सुनकर बहन के पैरों तले जमीन खिसक गई. घबराहट में उसने तुरंत इसकी सूचना परिवार के ही एक अन्य सदस्य यानी रिश्ते के भाई भादुलाल मोहारे को दी.
भाई का घर पहुंचना और गफलत: बहन की सूचना मिलने पर भादुलाल तुरंत दौड़ते हुए गोपाल के घर पहुंचे. जब उन्होंने अंदर जाकर देखा तो गोपाल अपने बिस्तर पर बिल्कुल सामान्य अवस्था में सोया हुआ था. स्थिति को सामान्य देखकर भाई को लगा कि शायद गोपाल ने शराब या किसी अन्य नशे में ऐसी बातें कह दी होंगी. उसने इस बात को अधिक गंभीरता से नहीं लिया और वापस लौट आया.
बार-बार फोन और अनहोनी की आशंका: कुछ ही समय बीता होगा कि बहन लता के पास गोपाल का दोबारा फोन आया. उसने फिर से वही बात दोहराई और आत्महत्या करने की जिद पर अड़ा रहा. जब बहन ने दोबारा भादुलाल को फोन कर स्थिति से अवगत कराया, तो वे तत्काल फिर से गोपाल के घर की ओर भागे.
दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश और फंदे पर लटका शव: जब भादुलाल दोबारा घर पहुंचे तो मुख्य दरवाजा अंदर से पूरी तरह बंद था. अंदर से कोई आहट न मिलने पर उन्होंने आसपास के लोगों की मदद से दरवाजा तोड़ दिया. जैसे ही वे अंदर दाखिल हुए, उनके होश उड़ गए—गोपाल फंदे पर लटका हुआ था. आनन-फानन में उसे तुरंत नीचे उतारा गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. गोपाल की सांसें हमेशा के लिए थम चुकी थीं.
पुलिस की कार्रवाई और पोस्टमार्टम प्रक्रिया
घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और उन्होंने तत्काल इसकी जानकारी ग्रामीण थाना पुलिस को दी. चूंकि रात का समय काफी अधिक हो चुका था, इसलिए पुलिस ने रात में औपचारिकताएं पूरी कर शुक्रवार की सुबह शव को जिला चिकित्सालय (बालाघाट) पहुंचाया.
शुक्रवार सुबह परिजनों और रिश्तेदारों की मौजूदगी में पुलिस ने पूरी गरिमा और पारदर्शिता के साथ पंचनामा कार्रवाई की. इसके बाद अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा शव का पोस्टमार्टम किया गया. पोस्टमार्टम की तमाम प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम संस्कार के लिए पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया.
पुलिस जांच और सामाजिक चिंता
ग्रामीण थाना पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर लिया है और गहराई से जांच-पड़ताल शुरू कर दी है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विसरा रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिवार के सदस्यों व रिश्तेदारों से विस्तृत पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर किस बात ने या किस मानसिक स्थिति ने इस年轻 (युवक) को इतना खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर किया.
परिवार के इकलौते बेटे की इस तरह अचानक हुई मौत ने पूरे पेंडरई गांव को झकझोर कर रख दिया है. समाज में मानसिक स्वास्थ्य, अपनों से संवाद और इस तरह के तनावपूर्ण पलों में सही समय पर काउंसलिंग व मदद मिलने की आवश्यकता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
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