
भोपाल। मध्य प्रदेश के सभी सरकारी और निजी चिकित्सा महाविद्यालयों (Medical Colleges) के छात्रावासों में अब शाकाहारी और मांसाहारी भोजन पकाने के लिए अलग-अलग रसोई (किचन) की व्यवस्था की जाएगी। छात्रों की धार्मिक आस्था, व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और भावनाओं के सम्मान को ध्यान में रखते हुए चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (DME) ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन और प्रबंधकों को इस संबंध में कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
छात्रों की शिकायतों के बाद संचालनालय का कदम
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ समय से कुछ निजी और सरकारी कॉलेजों के शाकाहारी छात्रों द्वारा लगातार शिकायतें की जा रही थीं कि हॉस्टल मेस की एक ही रसोई और बर्तनों में वेज और नॉनवेज दोनों तरह का भोजन तैयार किया जाता है। इससे शाकाहारी छात्रों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही थीं और मेस संचालन को लेकर असंतोष बढ़ रहा था। इन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए संचालनालय ने तत्काल संज्ञान लिया और व्यवस्था में नीतिगत सुधार का निर्णय लिया।
डीन को व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश
जारी आधिकारिक परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि जिन मेडिकल कॉलेजों के छात्रावासों में छात्रों को मांसाहारी भोजन परोसा जाता है, वहां प्रबंधन को तुरंत प्रभाव से दोनों वर्गों के लिए अलग-अलग किचन, चूल्हे और बर्तनों की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। इसका उद्देश्य यह तय करना है कि किसी भी छात्र को मेस में भोजन करते समय असहजता या धार्मिक मान्यताओं के उल्लंघन का सामना न करना पड़े।
विभाग ने सभी डीन को हॉस्टल मेस समितियों के साथ बैठक कर इस नए नियम का तत्काल पालन सुनिश्चित कराने और व्यवस्था संबंधी रिपोर्ट संचालनालय को भेजने के निर्देश दिए हैं।
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