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भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट वित्त वर्ष 2027 में 7.5 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 16 दिसंबर (आईएएनएस)। भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने की संभावना है। वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। यह जानकारी मंगलवार को जारी एक्सिस बैंक के इकोनॉमिक आउटलुक 2026 रिपोर्ट में दी गई है।

नई दिल्ली, 16 दिसंबर (आईएएनएस)। भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने की संभावना है। वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। यह जानकारी मंगलवार को जारी एक्सिस बैंक के इकोनॉमिक आउटलुक 2026 रिपोर्ट में दी गई है।

एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और एक्सिस कैपिटल के वैश्विक अनुसंधान प्रमुख नीलकंठ मिश्रा द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की अर्थव्यवस्था अपनी लंबी अवधि की विकास दर से भी तेजी से बढ़ सकती है।इसकी वजह देश की अर्थव्यवस्था में अभी भी काफी अप्रयुक्त क्षमता मौजूद होना है, जिससे आर्थिक वृद्धि को आसानी से बढ़ाया जा सकता है।

एक्सिस बैंक की रिपोर्ट में बताया गया कि भारत अपने वैश्विक समकक्षों की तुलना में और यहां तक कि बाजार की उम्मीदों से भी अधिक तेजी से विकास करेगा। ऐसा सरकारी वित्त पर दबाव कम होने, कम ब्याज दरों और सहायक मौद्रिक नीति से हो रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में निवेश गतिविधियां फिर से बढ़ने वाली हैं।

कंपनियों के बैलेंस शीट मजबूत होने, पूंजी की लागत कम होने और उत्पादन क्षमता अधिक होने के कारण कंपनियां वित्त वर्ष 2027 में पूंजी व्यय बढ़ा सकती हैं। यह नया निवेश चक्र आर्थिक गति को और मजबूत करेगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था में उत्पादन क्षमता में वृद्धि और पूंजी निर्माण में सुधार की उम्मीद है। इन दोनों के चलते भारत का दीर्घकालिक विकास दर करीब 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष में महंगाई करीब 4 प्रतिशत रह सकती है। हालांकि, खाद्य पदार्थों की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन मूल्य दबाव कम रहेगा।

रिपोर्ट ने कहा गया कि औसत महंगाई, जो मुख्य मूल्य रुझानों को बेहतर तरीके से दर्शाती है, पिछले 18 महीनों से 3 प्रतिशत के करीब बनी हुई है। इससे यह पता चलता है कि मांग का दबाव कम है और अर्थव्यवस्था में बिना किसी रुकावट के तेजी से बढ़ सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मौद्रिक नीति में ब्याज दरें अब लगभग अपने सबसे न्यूनतम स्तर के करीब हैं। हालांकि, मुद्रा आपूर्ति बढ़ सकती है, ताकि क्रेडिट फ्लो को बढ़ाया जा सके और अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिले।

--आईएएनएस

दुर्गेश बहादुर/एबीएस

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