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भोपाल: पमरे मजदूर संघ के नेता ने स्कूली बच्चों की फीस के 37 लाख डकारे, स्कूल बस भी बेची, पद से बर्खास्त


भोपाल (मध्य प्रदेश): पश्चिम मध्य रेलवे (पमरे) के भोपाल मंडल में एक बेहद चौंकाने वाला वित्तीय घोटाला सामने आया है। रेलवे समाज कल्याण केंद्र के सचिव और पमरे मजदूर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी नितिन परमार पर स्कूली बच्चों की फीस के 37 लाख रुपए से अधिक की राशि खुद डकारने (गबन करने) का गंभीर आरोप लगा है। इतना ही नहीं, परमार पर स्कूल परिसर में खड़ी एक बस को भी बिना कार्यकारिणी की अनुमति के औने-पौने दामों पर बेचकर उसका पैसा खुद रख लेने का आरोप है। मामला उजागर होने के बाद मजदूर संघ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नितिन परमार को पद से बर्खास्त कर प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है।

सैलरी न मिलने पर खुला घोटाला, कैशियर को डराने का आरोप

रेलवे की जमीन पर संचालित इस समाज कल्याण केंद्र स्कूल में केजी-1 से लेकर 12वीं तक की कक्षाएं संचालित होती हैं, जहाँ रेल कर्मचारियों के बच्चों के साथ आसपास की कॉलोनियों के बच्चे भी शिक्षा ग्रहण करते हैं। इस स्कूल का संचालन और शिक्षकों का वेतन पूरी तरह से बच्चों से मिलने वाली मासिक फीस पर निर्भर है।

इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ, जब स्कूल के शिक्षकों और अन्य स्टाफ को कई महीनों से वेतन (सैलरी) नहीं मिला। शिक्षकों द्वारा जब भी वेतन की मांग की जाती, तो उन्हें टरका दिया जाता था। मामला जब उच्च अधिकारियों तक पहुंचा और आंतरिक जांच शुरू हुई, तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। जांच में पता चला कि बच्चों द्वारा जमा की जाने वाली फीस को समाज कल्याण केंद्र के बैंक खातों में जमा कराने के बजाय, सचिव नितिन परमार स्कूल के कैशियर को डरा-धमकाकर खुद नकद (कैश) रख लेता था। खातों में राशि न बचने के कारण स्टाफ की सैलरी पूरी तरह रुक गई थी।

 जुलाई 2023 से चल रहा था गबन का खेल

विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह वित्तीय अनियमितता पिछले काफी समय से सुनियोजित तरीके से चल रही थी। जुलाई 2023 में कार्यकारिणी का कार्यभार संभालने के बाद से ही हबीबगंज स्थित रेलवे कोचिंग डिपो के तकनीशियन (Technician) और केंद्र के सचिव नितिन परमार ने बिना कार्यकारिणी की अनुमति के लगातार स्कूल की नकद आय को अपने पास रखना शुरू कर दिया था।

रिकॉर्ड के मुताबिक, शिक्षण सत्र 2024-25 और 2025-26 के दौरान बच्चों की फीस के रूप में जमा हुए करीब 37 लाख रुपए उन्होंने नकद निकाले और बाकायदा रजिस्टर में अपने हस्ताक्षर भी किए। इसके अलावा, स्कूल परिसर में खड़ी एक बस को भी बिना किसी मंजूरी के दो से तीन लाख रुपए में बेच दिया गया, जिसका कोई हिसाब संस्थान के पास नहीं है।

विजिलेंस और सीनियर डीपीओ ने संभाली जांच की कमान

मामले की गंभीरता को देखते हुए समाज कल्याण केंद्र की कार्यकारिणी ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई और रेल प्रशासन से इसकी लिखित शिकायत की। इसके साथ ही:

  • भोपाल मंडल के सीनियर डीपीओ (Sr. DPO) विजय सिंह द्वारा पूरे मामले की प्रशासनिक जांच शुरू कर दी गई है।

  • इस पूरे घोटाले की आधिकारिक शिकायत पमरे मुख्यालय, जबलपुर में विजिलेंस विभाग (सर्तकता विभाग) से भी की गई है।

रेलवे प्रशासन और विजिलेंस की टीम अब दस्तावेजों और वित्तीय रजिस्टरों को खंगाल रही है, ताकि गबन की गई वास्तविक राशि का सटीक आकलन कर आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।

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