
ग्वालियर स्थित गजराराजा मेडिकल कॉलेज की सीधी भर्ती प्रक्रिया को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना निर्धारित प्रक्रिया अपनाए पदोन्नति के पदों को सीधी भर्ती में बदलना कानूनन गलत है। कोर्ट ने 6 फरवरी 2026 को जारी ‘इन-हाउस’ सीधी भर्ती के विज्ञापन को भी निरस्त कर दिया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि सीधी भर्ती में पूर्व सेवा रिकॉर्ड का महत्व नहीं होता, जिससे पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित होते हैं। ऐसे में पदोन्नति के अवसर समाप्त करना न्यायसंगत नहीं है।
यह मामला याचिकाकर्ता डॉ. आशीष कौशल द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया था। उन्होंने ऑर्थोपेडिक्स विभाग में प्रोफेसर के रिक्त पद को विभागीय पदोन्नति से भरने की मांग की थी। उनका कहना था कि वे वर्ष 2013 से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं और पदोन्नति के पात्र हैं।
वहीं, कॉलेज प्रशासन और राज्य सरकार ने दलील दी थी कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक मामले के कारण पदोन्नति संभव नहीं थी, इसलिए आपात स्थिति में सीधी भर्ती प्रक्रिया अपनाई गई।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए निर्देश दिए कि पहले पदोन्नति के लिए पारदर्शी और स्पष्ट मूल्यांकन प्रक्रिया तय की जाए। यदि इसके बाद भी बाधा आती है, तो नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए, जिसमें चयन के मापदंड पदोन्नति के समान हों।
इस फैसले से मेडिकल कॉलेजों में भर्ती प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण संदेश गया है।
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