
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में किसानों के हित में एक क्रांतिकारी निर्णय लिया गया है। अब सरकारी परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाने वाली किसानों की जमीन पर उन्हें बाजार मूल्य से 4 गुना अधिक मुआवजा प्राप्त होगा। प्रदेश के किसान संगठन और ग्रामीण लंबे समय से मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग कर रहे थे, जिसे सरकार ने अब अमलीजामा पहना दिया है। इस फैसले से सड़क, सिंचाई और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भूमि देने वाले किसानों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। कैबिनेट ने इसके लिए 'मल्टीप्लिकेशन फैक्टर' में बदलाव को हरी झंडी दे दी है।
राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक मध्य प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के लिए फैक्टर 1.00 प्रभावी था, जिसके तहत किसानों को बाजार मूल्य का दोगुना मुआवजा मिलता था। हालांकि, केंद्र सरकार के 2013 के अधिनियम के अनुसार राज्यों को इसे 2 तक बढ़ाने का अधिकार था। मोहन यादव सरकार ने अब इस 'मल्टीप्लिकेशन फैक्टर' को बढ़ाकर 2 कर दिया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन जाने पर किसानों को मिलने वाली राशि पहले के मुकाबले दोगुनी हो जाएगी, यानी कुल 4 गुना मुआवजा सुनिश्चित होगा।
कैबिनेट की इस महत्वपूर्ण बैठक में केवल मुआवजा ही नहीं, बल्कि प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी खजाना खोल दिया गया है। सरकार ने विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए 33 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि को मंजूरी दी है। इसमें लोक निर्माण विभाग (PWD) के तहत सड़कों और जिला मार्गों के उन्नयन के लिए 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति शामिल है। उज्जैन की इंदु रूदाहेड़ा सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए भी 151 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे 35 गांवों की 10 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित हो सकेगी। इसके अतिरिक्त पुलों के निर्माण के लिए भी लगभग 9950 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ी सौगातें दी हैं। कैबिनेट ने कक्षा 6वीं और 9वीं के छात्रों के लिए निःशुल्क साइकिल वितरण योजना को अगले 5 वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया है। इसके लिए 990 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। साथ ही, प्रदेश के शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक और बेहतर बनाने के लिए 1200 करोड़ रुपये खर्च करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है। इसके अलावा, सरकारी भवनों की मरम्मत और संधारण के लिए 735 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन फैसलों से स्पष्ट है कि सरकार विकास के साथ-साथ सामाजिक कल्याण पर भी विशेष ध्यान दे रही है।
Leave A Reviews