
पन्ना जिले से एक बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आई है। यहाँ कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक बेहद आक्रामक और अनोखा विरोध प्रदर्शन किया है। महिला कांग्रेस के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने शहर के प्रसिद्ध डायमंड चौराहे से लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यालय तक चुनाव आयोग की 'अर्थी यात्रा' निकाली। इस पन्ना कांग्रेस प्रदर्शन के दौरान माहौल तब गरमा गया जब भाजपा कार्यालय के ठीक सामने मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन किया गया, जिसे रोकने के लिए पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर झूमाझटकी हुई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि देश का निर्वाचन आयोग अब एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संवैधानिक संस्था नहीं रह गया है, बल्कि वह पूरी तरह से सत्तापक्ष के इशारों पर काम कर रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में जुटी महिला कांग्रेस की कार्यकर्ता और पुरुष पदाधिकारी हाथों में तख्तियां लेकर 'चुनाव आयोग मर गया' के तीखे नारे लगाते हुए सड़कों पर उतरे।
जैसे ही यह विवादित शव यात्रा भाजपा जिला कार्यालय के समीप पहुंची, वहां पहले से मुस्तैद भारी पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेडिंग कर रोकने का प्रयास किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की चलती रही। हालांकि, पुलिस के कड़े विरोध और घेराबंदी के बावजूद आक्रोशित कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंकने में कामयाब रहे।
इस बड़े पन्ना कांग्रेस प्रदर्शन का मुख्य नेतृत्व महिला कांग्रेस की कद्दावर नेता आस्था तिवारी ने किया। उन्होंने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह उग्र आंदोलन कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के राष्ट्रव्यापी आह्वान और जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनीश खान के विशेष निर्देशन में आयोजित किया गया था। कांग्रेस पार्टी चुनाव प्रक्रिया में हो रहे कथित पक्षपात के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रही है।
पुतला दहन के बाद महिला कांग्रेस नेता आस्था तिवारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर बेहद गंभीर और तीखे व्यक्तिगत आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पूरी तरह से अपनी गरिमा खो चुका है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सत्ताधारी दल के 'तोते' की तरह काम कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा, "जब देश के इतने बड़े और महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति खुलेआम इस तरह का राजनीतिक पक्षपात करेगा, तो देश की जनता और विपक्ष का चुनाव आयोग से विश्वास उठना बिल्कुल लाजिमी है। इसी तानाशाही और पक्षपात के विरोध में आज हमें यह शव यात्रा निकालने पर मजबूर होना पड़ा है।" इस प्रदर्शन के बाद से जिले की स्थानीय राजनीति में सरगर्मी काफी तेज हो गई है।
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