
झांसी. उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने सोमवार को झांसी में आयोजित एक सार्वजनिक सुनवाई के दौरान बिजली उपभोक्ताओं के हित में बड़ा फैसला सुनाया है. आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर रिचार्ज करने के बाद यदि दो घंटे के भीतर बिजली कनेक्शन चालू नहीं होता है, तो उपभोक्ता विभाग से मुआवजे (Compensation) की मांग कर सकते हैं.
स्मार्ट मीटर टेंडर में धांधली और CBI जांच की मांग
सुनवाई के दौरान राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने स्मार्ट मीटर परियोजना पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि:
केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 18,885 करोड़ स्वीकृत किए थे.
उत्तर प्रदेश में इसका टेंडर उद्योगपतियों को 27,342 करोड़ में दिया गया.
वर्मा ने इस भारी अंतर और कथित घोटाले की CBI जांच कराने की पुरजोर मांग की.
उपभोक्ताओं का 51,000 करोड़ सरप्लस: दरें कम करने की अपील
उपभोक्ता परिषद ने आयोग के सामने तथ्य रखा कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का लगभग 51,000 करोड़ सरप्लस निकल रहा है. इसके आधार पर बिजली की दरों में तत्काल कमी करने की मांग की गई है. इसके अलावा, बुंदेलखंड क्षेत्र से उद्योगों के पलायन को रोकने के लिए विशेष बिजली पैकेज देने की बात भी कही गई.
सुनवाई के दौरान उठी अन्य प्रमुख मांगें:
24 घंटे बिजली: पूरे प्रदेश से रोस्टर व्यवस्था खत्म कर सभी क्षेत्रों को निर्बाध बिजली दी जाए.
कृषि का दर्जा: मछली पालन को कृषि श्रेणी में शामिल कर सस्ती बिजली दी जाए.
घरेलू श्रेणी में राहत: घर में छोटी दुकान चलाकर आजीविका कमाने वालों को कमर्शियल के बजाय 'घरेलू श्रेणी' का लाभ मिले.
निजीकरण पर रोक: टोरेंट पावर का अनुबंध समाप्त करने और संविदा कर्मियों की छंटनी रोकने की मांग की गई.
अधिकारियों को चेतावनी
सुनवाई में एक वायरल वीडियो का भी जिक्र हुआ जिसमें पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष अभियंताओं पर कार्रवाई की बात कह रहे हैं. आयोग ने इस पर हस्तक्षेप करने का आश्वासन दिया है. इस दौरान दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक और अन्य उच्चाधिकारी भी मौजूद रहे.
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