
दमोह। जिले में गैस एजेंसियों द्वारा उपभोक्ताओं के साथ की जा रही मनमानी और कालाबाजारी पर प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के निर्देशन में बुधवार को जिले की सभी 20 गैस एजेंसियों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस औचक कार्रवाई से पूरे जिले के गैस डीलरों में हड़कंप मच गया है।
रणनीति और छापेमारी कलेक्टर ने बताया कि उपभोक्ताओं से लगातार गैस सिलेंडरों की देरी से आपूर्ति और निर्धारित दर से अधिक राशि वसूली की शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार रात को ही गोपनीय रणनीति तैयार की गई थी। बुधवार सुबह ठीक 10 बजे, 21 जांच दलों ने एक साथ जिले की सभी एजेंसियों पर दबिश दी। इस टीम में उज्ज्वला योजना के कार्डों के दुरुपयोग की जांच के लिए एक विशेष दल भी शामिल किया गया था।
जांच में बड़े खुलासे: 2138 सिलेंडरों का हेरफेर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, जिले की 20 में से 15 गैस एजेंसियों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। सबसे चौंकाने वाला तथ्य सिलेंडरों के स्टॉक में मिला अंतर है। फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान स्टॉक रजिस्टर और मौके पर मौजूद सिलेंडरों की संख्या में कुल 2138 सिलेंडरों का अंतर पाया गया है। कई जगहों पर सिलेंडर कम मिले, तो कहीं कागजों से अधिक सिलेंडर मौके पर पाए गए, जो सीधे तौर पर कालाबाजारी और अवैध भंडारण की ओर इशारा करते हैं।
उज्ज्वला योजना के कार्ड जब्त तेंदूखेड़ा के 27 मील स्थित महावीर हार्डवेयर ट्रेडर्स पर की गई कार्रवाई में 23 गैस कार्ड जब्त किए गए। इनमें 22 कार्ड उज्ज्वला योजना के और एक सामान्य कार्ड शामिल है। नियमों के अनुसार, ये कार्ड हितग्राहियों के पास होने चाहिए थे, लेकिन इनका किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे में मिलना यह दर्शाता है कि इन कार्डों का उपयोग महंगे दामों पर सिलेंडर बेचने के लिए किया जा रहा था।
कठोर कानूनी कार्रवाई की तैयारी कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने स्पष्ट किया है कि दोषी पाई गई एजेंसियों के खिलाफ द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस प्रदाय आदेश 2000 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी और अवैध वितरण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन अब विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद कुछ लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
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