
बिलासपुर (छत्तीसगढ़). बिलासपुर ट्रेन हादसे की जांच में रेलवे की बड़ी लापरवाही सामने आई है। कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि हादसे के समय मेमू लोकल ट्रेन चला रहे लोको पायलट विद्यासागर कुशवाहा साइकोलॉजिकल टेस्ट में फेल थे। रेलवे अधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद उन्होंने उन्हें ट्रेन संचालन की अनुमति दे दी थी।
रेलवे के नियमों के अनुसार, पैसेंजर ट्रेन चलाने से पहले साइकोलॉजिकल टेस्ट पास करना अनिवार्य है। यह परीक्षा चालक की मानसिक स्थिति, निर्णय क्षमता और आपातकालीन स्थिति में प्रतिक्रिया की जांच करती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि विद्यासागर पहले मालगाड़ी चलाते थे और एक माह पहले ही पदोन्नति पाकर पैसेंजर ट्रेन संचालन में लगाए गए थे। टेस्ट में फेल होने के बावजूद उन्हें सहायक चालक के साथ ट्रेन चलाने की जिम्मेदारी सौंप दी गई, जो हादसे का प्रमुख कारण बना।
तकनीकी खामियां और लापरवाही दोनों जिम्मेदार
सीआरएस अधिकारी बी.के. मिश्रा ने 6 नवंबर को बिलासपुर डीआरएम कार्यालय में सुबह से देर रात तक कई विभागीय अधिकारियों से पूछताछ की। इसमें एरिया बोर्ड, कंट्रोलर विभाग, एआरटी और एआरएमवी इंचार्ज शामिल थे। जांच में यह भी पाया गया कि गेवरारोड स्टेशन के पास ऑटो सिग्नलिंग सिस्टम में तकनीकी खराबी और संचार व्यवस्था में गड़बड़ी भी हादसे की वजह बनी।
रेलवे की पांच सदस्यीय टीम ने रिपोर्ट में कहा है कि प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी और नियमों के उल्लंघन ने हादसे को और गंभीर बना दिया। अब रेलवे उन अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है जिन्होंने फेल पायलट को जिम्मेदारी सौंपी थी। जांच टीम हादसे से जुड़े सभी दस्तावेज, सिग्नल डाटा और ऑडियो लॉग्स का विश्लेषण कर रही है ताकि तकनीकी और मानवीय चूक दोनों की सटीक पहचान की जा सके।
मानवता की मिसाल: कंपनी उठाएगी पायलट की बेटियों की जिम्मेदारी
इस बीच, हादसे में जान गंवाने वाले लोको पायलट विद्यासागर कुशवाहा के परिवार के लिए एक संवेदनशील पहल सामने आई है। क्लीन कोल इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने उनकी तीनों बेटियों की शिक्षा और विवाह का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की है। कंपनी के संचालक संजय अग्रवाल ने इस संबंध में बिलासपुर जिला कलेक्टर और डीआरएम को लिखित सूचना दी है।
कंपनी ने यह भी वादा किया है कि वह हादसे में मारे गए अन्य रेलकर्मियों और यात्रियों के बच्चों की शिक्षा में भी मदद करेगी। प्रशासन ने इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) का प्रेरक उदाहरण है।
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