
छतरपुर: बुंदेलखंड की महत्वाकांक्षी और ₹44,000 करोड़ की लागत वाली 'केन-बेतवा लिंक परियोजना' भारी विरोध के चलते संकट में घिर गई है। विस्थापन और मुआवजे की मांगों को लेकर दिल्ली कूच करने से रोके जाने के बाद, आक्रोशित आदिवासियों और किसानों ने ढोढन बांध स्थल पर ही मोर्चा खोल दिया है। पिछले दो दिनों से चल रहे इस धरने के कारण परियोजना का निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो गया है।
बिजावर अनुविभाग के ढोढन बांध स्थल पर हजारों की संख्या में ग्रामीण और महिलाएं भारी मशीनों के सामने धरने पर बैठ गए हैं। हाथों में तख्तियां लेकर "जल, जंगल और जमीन" बचाने के नारे लगाती महिलाओं ने साफ कर दिया है कि वे अपने अस्तित्व की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगी। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी अमित भटनागर का आरोप है कि प्रशासन ने ग्रामीणों को दिल्ली जाने से रोककर उन्हें प्रताड़ित किया और उनका राशन तक छीन लिया, जिसके कारण अब यह लड़ाई 'आर-पार' की हो गई है।
विरोध की मुख्य जड़ केन नदी पर बनने वाला 77 मीटर ऊँचा ढोढन बांध है। यह निर्माण पन्ना नेशनल पार्क के 'कोर क्षेत्र' के समीप हो रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण को बड़ा खतरा है, बल्कि हज़ारों आदिवासियों के विस्थापन की तलवार भी लटक रही है। 221 किमी लंबी नहर और 2 किमी लंबी टनल वाली इस परियोजना से ग्रामीण अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं।
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए सटई तहसीलदार इंद्र कुमार गौतम ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वार्ता बेनतीजा रही। ग्रामीण अपनी मांगों पर अडिग हैं और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फिलहाल, बांध स्थल पर काम बंद है और प्रशासन बीच का रास्ता निकालने की कोशिशों में जुटा है।
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