
दुबई. मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान को अब तक का सबसे बड़ा सुरक्षा झटका लगा है। खबरों के अनुसार, एक भीषण हमले में ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुख्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नैनी की मौत हो गई है। जनरल नैनी को न केवल IRGC का चेहरा माना जाता था, बल्कि वे ईरान के मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) के मास्टरमाइंड भी थे। इस हमले की पुष्टि ईरानी सरकारी मीडिया ने की है, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध की आहट और तेज हो गई है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ब्रिगेडियर जनरल नैनी को निशाना बनाने के लिए बेहद सटीक और अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही समय में सैन्य प्रवक्ता और देश के खुफिया प्रमुख का मारा जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि हमलावरों के पास ईरान के सबसे सुरक्षित ठिकानों और प्रोटोकॉल की सटीक जानकारी थी। खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब की मौत ने ईरान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि उन पर देश के भीतर और बाहर जासूसी नेटवर्क को संभालने की मुख्य जिम्मेदारी थी।
ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने इस्माइल खतीब और जनरल नैनी की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उनका यह संदेश न केवल दुख प्रकट करता है, बल्कि इसे भविष्य में ईरान के कड़े जवाबी रुख के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। तेहरान के सत्ता गलियारों में इस हमले के बाद बदले की मांग तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि साल 2020 में कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद यह ईरान के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा संकट और 'अपूरणीय क्षति' है।
ईरान ने इस दोहरे हमले के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है, जिसे एक 'संयुक्त अभियान' बताया जा रहा है। हालांकि, वाशिंगटन और यरुशलम ने फिलहाल इन रिपोर्टों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। इस घटना ने पूरे पश्चिम एशिया को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। यदि ईरान जवाबी कार्रवाई करता है, तो यह संघर्ष एक पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो सकता है, जिसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कूटनीति पर पड़ना निश्चित है।
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