
छतरपुर जिले अंतर्गत बड़ामलहरा वन परिक्षेत्र के पिपरिया नाले में एक तेंदुए का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा नाले में वन्यप्राणी का शव देखे जाने के बाद तत्काल वन अधिकारियों को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग का गश्ती दल और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। शुरुआती निरीक्षण में तेंदुए की मौत प्राकृतिक कारणों अथवा आपसी संघर्ष की वजह से होने की संभावना जताई जा रही है।
छतरपुर के वनमंडलाधिकारी (DFO) ऋषि मिश्र ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत कार्रवाई शुरू की गई। घटनास्थल की तत्काल घेराबंदी (कॉर्डन ऑफ) कर पूरे इलाके को सील कर दिया गया। किसी भी प्रकार के अवैध शिकार या मानवीय हस्तक्षेप की आशंका को खारिज करने के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) से विशेष रूप से प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉयड को मौके पर बुलाया गया। डॉग स्क्वॉयड और फॉरेंसिक टीम ने घटना स्थल और आसपास के पूरे वन क्षेत्र में सघन छानबीन की।
तेंदुए के शव का पोस्टमार्टम पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता एवं बड़ामलहरा के पशु चिकित्सक बृजेश कुमार कोर के संयुक्त पैनल द्वारा किया गया। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक परीक्षण के दौरान तेंदुए के नाखून, दांत, खाल और आंतरिक अंगों सहित सभी महत्वपूर्ण अंग पूरी तरह सुरक्षित पाए गए, जिससे प्रथम दृष्टया शिकार की आशंका काफी कम मानी जा रही है। डॉक्टरों के पैनल द्वारा विसरा सुरक्षित करने के उपरांत अधिकारियों की मौजूदगी में विधि-विधान और निर्धारित गाइडलाइंस के अनुसार तेंदुए के शव का अंतिम संस्कार (दाह-संस्कार) कराया गया।
वन विभाग ने इस मामले में विधिक प्रक्रिया के तहत वन अपराध प्रकरण (POR) दर्ज कर लिया है। डीएफओ ऋषि मिश्र ने मामले की गहराई से जांच के लिए उपवनमंडलाधिकारी (SDO) बकस्वाहा को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। वन अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम की विस्तृत लैब रिपोर्ट और विसरा जांच के नतीजे आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल घटनास्थल से जुटाए गए भौतिक साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
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