
डिंडौरी जिले में वन विभाग का एक नया विवाद सामने आया है। पूर्व करंजिया वन परिक्षेत्र की रेंजर कौशांबी झा पर वन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष से दबाव बनाकर 3 लाख 44 हजार रुपये नकद लेने का गंभीर आरोप लगा है। बुधवार को पांच वन सुरक्षा समितियों के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिला वनमंडलाधिकारी (DFO) अशोक कुमार सोलंकी के कार्यालय पहुंचकर रेंजर के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। DFO ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और 10 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
जगतपुर वन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष मोहन सिंह करचाम ने शिकायत में बताया कि मुख्य मार्ग से कपोटी टोला तक सीसी सड़क निर्माण कार्य के लिए 4 लाख 66 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हुई थी। समिति ने निर्माण कार्य के लिए राशि आहरित की थी और 12 अक्टूबर को श्रमिकों का भुगतान भी किया गया था। आरोप है कि रेंजर कौशांबी झा ने वनरक्षक चरण सिंह के माध्यम से अध्यक्ष को रेस्ट हाउस बुलवाया। आरोप के अनुसार, वहां एक कमरे में बंद कर उनसे पूछा गया कि निर्माण राशि में से कितने पैसे शेष बचे हैं और दबाव बनाते हुए शेष 3 लाख 44 हजार रुपये नकद ले लिए गए। अध्यक्ष ने जब ग्रामीणों को हिसाब देने की बात कही, तो उसे भी अनसुना कर दिया गया।
ग्रामीण जगदीश प्रताप सिंह धुर्वे ने आरोप लगाया कि जब वन सुरक्षा समिति के सदस्यों ने इस मामले को लेकर बैठक की, तो रेंजर गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को धमकाने लगीं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें झूठे वन अपराध में फंसाने और निर्माण में लगे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को राजसात कराने की चेतावनियां दी जा रही हैं। आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग ने निर्धारित 10 दिनों की समय-सीमा के भीतर रेंजर पर ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की, तो सभी समितियां जिला मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगी।
इधर, रेंजर कौशांबी झा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह मनगढ़ंत और बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि जगतपुर वन ग्राम में बिना विभागीय अनुमति के नौ अलग-अलग स्थानों पर व्यावसायिक होम स्टे बनाए जा रहे थे। इस गैर-कानूनी गतिविधि की जांच कर प्रतिवेदन पूर्व में ही DFO कार्यालय भेजा जा चुका है। रेंजर का कहना है कि उन्होंने वन भूमि पर बिना अनुमति हो रहे निर्माण कार्यों को रोकने की सख्त कार्रवाई की थी, जिससे नाराज होकर कुछ लोग बदले की नीयत से झूठी और आधारहीन शिकायतें कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वन समितियां कार्य करने के लिए स्वतंत्र एजेंसी हैं, लेकिन वन क्षेत्र में होने वाले कार्यों की वैधानिक अनुमति और तकनीकी निरीक्षण वन विभाग का दायित्व है।
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