
छतरपुर स्थित नर्मदा केयर अस्पताल में मंगलवार को प्रसव के बाद 26 वर्षीय ललिता राजपूत की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के बाद लगातार हो रहे अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) के बावजूद अस्पताल प्रबंधन और ड्यूटी डॉक्टर ने समय पर उचित उपचार नहीं दिया। हालत नाजुक होने पर देर रात करीब 2:30 बजे महिला को झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद परिजनों में गहरा आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन व महिला चिकित्सक पर गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए छतरपुर कलेक्टर मृणाल मीना ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को जांच के निर्देश दिए हैं।
मृतका के ससुर राजाराम राजपूत के अनुसार, वे 2 नवंबर को ललिता को प्रसव पीड़ा और जांच के लिए छतरपुर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहां जिला अस्पताल में पदस्थ महिला रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) डॉ. साक्षी गंगेले को दिखाया गया। परिजनों का दावा है कि डॉ. गंगेले ने सरकारी अस्पताल के बजाय उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी, जिसके बाद मंगलवार को ललिता को नर्मदा केयर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल में भर्ती होने के बाद ललिता ने एक नवजात बच्ची को जन्म दिया। डिलीवरी के तुरंत बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और रक्तस्राव रुकने का नाम नहीं ले रहा था। परिजनों के मुताबिक, कई घंटों तक स्थिति गंभीर रहने के बाद रात करीब 10 बजे औपचारिक इलाज शुरू किया गया और अस्पताल प्रबंधन ने खून की कमी बताते हुए 2 यूनिट ब्लड लाने को कहा, जिसे परिजनों ने 4-4 हजार रुपए देकर ब्लड बैंक से जुटाया।
रक्त चढ़ाने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और रात 12 बजे के आसपास ललिता की हालत बेहद नाजुक हो गई। परिजनों के बार-बार गुहार लगाने के बाद देर रात करीब 2:30 बजे डॉ. साक्षी गंगेले अस्पताल पहुंचीं और उन्होंने गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रसूता को झांसी रेफर कर दिया। परिजन एम्बुलेंस से झांसी ले जा रहे थे, तभी रास्ते में ललिता की मौत हो गई। इसके बाद परिजन शव लेकर वापस छतरपुर जिला अस्पताल पहुंचे और शव को पोस्टमॉर्टम कक्ष में रखवाया।
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