
नई दिल्ली में गुरुवार को परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रस्तावित परिसीमन अभ्यास का उपयोग सत्तारूढ़ पार्टी उन क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए कर रही है, जहां उसका प्रभाव अधिक है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को महिला आरक्षण लागू करने की आड़ में “राजनीतिक विमुद्रीकरण” करार दिया।
पत्रकारों से बातचीत में थरूर ने कहा कि सरकार निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के माध्यम से राजनीतिक संतुलन को बदलने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, इस योजना का उद्देश्य उन क्षेत्रों में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना है जहां सत्ताधारी दल मजबूत स्थिति में है, जबकि कमजोर क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कम किया जा सकता है। उन्होंने इसे “राजनीतिक नोटबंदी” बताते हुए कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
शशि थरूर ने आगे कहा कि यदि सरकार का वास्तविक उद्देश्य महिला सशक्तिकरण होता, तो महिला आरक्षण विधेयक को तुरंत लागू किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि सरकार इसे परिसीमन से जोड़कर प्रक्रिया को जटिल बना रही है, जबकि विपक्ष चाहता है कि आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। थरूर ने यह भी कहा कि सभी राजनीतिक दल इस बात पर सहमत हैं कि महिला आरक्षण का समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन इसे परिसीमन के साथ जोड़ना उचित नहीं है।
उन्होंने परिसीमन प्रक्रिया पर व्यापक और पारदर्शी चर्चा की मांग की और कहा कि इसमें सभी राज्यों की जनसंख्या वृद्धि दर और आर्थिक योगदान जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। थरूर के अनुसार, किसी भी बदलाव से पहले सभी राज्यों के दृष्टिकोण का समुचित विश्लेषण आवश्यक है।
वहीं, कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने भी परिसीमन को महिला आरक्षण से जोड़ने का विरोध किया, हालांकि उन्होंने महिला आरक्षण का समर्थन दोहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस प्रक्रिया के माध्यम से संवैधानिक ढांचे को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है, जिसका विपक्ष विरोध करता है।
इसी बीच लोकसभा में परिसीमन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयक—परिसीमन विधेयक 2026, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026—पेश किए गए। विपक्ष द्वारा विभाजन (division vote) की मांग के बाद हुए मतदान में 333 में से 251 वोट विधेयकों के पक्ष में और 185 वोट विपक्ष में पड़े, जिसके बाद इन्हें पेश करने की अनुमति मिल गई।
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