
नई दिल्ली। लोकसभा में गुरुवार को महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन प्रक्रिया को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह महिला आरक्षण को लागू करने की आड़ में परिसीमन प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से महिला आरक्षण के पक्ष में रही है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना गलत है और इससे इसका उद्देश्य जटिल हो जाता है।
गोगोई ने सदन में कहा कि सरकार को महिला आरक्षण को एक सरल विधेयक के रूप में पेश करना चाहिए ताकि इसे बिना देरी के लागू किया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार ने पहले उनकी सलाह मानी होती तो यह कानून पहले ही लागू हो चुका होता। उनके अनुसार, सरकार की वर्तमान नीति महिला आरक्षण को जानबूझकर विलंबित करने की ओर संकेत करती है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि महिला आरक्षण को मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर तुरंत लागू किया जाना चाहिए और इसे परिसीमन प्रक्रिया से अलग रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इसे 2029 तक टालना उचित नहीं है। गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार का असली उद्देश्य महिला आरक्षण नहीं बल्कि परिसीमन को आगे बढ़ाना है, और इसे राजनीतिक रणनीति के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने गृह मंत्री के पिछले बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि 2023 में जनगणना, परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर जो आश्वासन दिए गए थे, उनमें अब बदलाव दिखाई दे रहा है। गोगोई ने दावा किया कि सरकार धीरे-धीरे इन प्रक्रियाओं को जोड़कर आगे बढ़ा रही है, जिससे महिला आरक्षण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
लोकसभा में दिए अपने संबोधन में उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि लोकसभा सदस्यों की संख्या 815 करने का निर्णय कैसे लिया गया और इसके पीछे क्या आधार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है, जबकि भारत के संविधान निर्माताओं ने ऐसी व्यवस्था राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बनाई थी।
गोगोई ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में महिला आरक्षण के प्रति गंभीर होती तो इसे तुरंत लागू किया जाता, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़कर प्रक्रिया को जटिल बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे “पर्दे के पीछे परिसीमन को आगे बढ़ाने की रणनीति” बताया।
Leave A Reviews