
दमोह जिले अंतर्गत जबेरा विकासखंड के ग्राम कुसमी मानगढ़ की आदिवासी महिलाएं सोमवार दोपहर अनूठे अंदाज में विरोध दर्ज कराने कलेक्ट्रेट पहुंचीं। अपने आशियाने और आजीविका को बचाने के लिए महिलाएं हाथों में रस्सियां बांधकर प्रशासनिक परिसर में दाखिल हुईं और जमकर नारेबाजी की। महिलाओं ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर गांव की 50 एकड़ शासकीय भूमि को एक निजी गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) को लीज पर न देने की गुहार लगाई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह जमीन निजी संस्था को दी गई तो वर्षों से रह रहे आदिवासी परिवार बेघर और दाने-दाने को मोहताज हो जाएंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को व्यथा सुनाते हुए बताया कि वे इस 50 एकड़ भूमि पर पिछले 50 वर्षों से काबिज हैं। यहां करीब 50 आदिवासी परिवारों के कच्चे-पक्के मकान बने हुए हैं और वे इसी जमीन पर परंपरागत खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। ग्रामीण समय-समय पर वन एवं राजस्व विभाग द्वारा लगाए जाने वाले जुर्माने का नियमित भुगतान भी करते आ रहे हैं। उनका सीधा आरोप है कि प्रशासन अब इस उपजाऊ और रिहायशी जमीन को 'जन कल्याण न्यास' नामक एक निजी संस्था को लीज पर आवंटित करने की तैयारी में है।
महिलाओं ने पंचायत और स्थानीय मैदानी अमले पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जमीन आवंटन से पूर्व ग्राम पंचायत द्वारा न तो कोई मुनादी कराई गई और न ही ग्रामीणों को कोई विधिवत सूचना दी गई। आरोप है कि कोटवार द्वारा गांव में यह अफवाह फैलाई गई कि गांव में एक बड़ा सीएम राइज स्कूल स्वीकृत हुआ है, जिसके नाम पर भोले-भाले ग्रामीणों से कागजों पर दस्तखत और अंगूठे लगवा लिए गए। बाद में जब आदिवासियों को जमीन खाली करने का फरमान सुनाया गया, तब जाकर इस धोखे का खुलासा हुआ।
प्रदर्शन के दौरान जिला पंचायत सदस्य रजनी ठाकुर और कांग्रेस नेता नितिन मिश्रा भी पीड़ित आदिवासी महिलाओं के साथ मौजूद रहे। कांग्रेस नेता नितिन मिश्रा ने 'जन कल्याण न्यास' की पृष्ठभूमि और उसकी गतिविधियों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन ने गरीब आदिवासियों को उजाड़ने की कोशिश की, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। मामले में प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर न्यायसंगत कार्रवाई की जाएगी।
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