
दमोह जिले में सरकारी स्कूलों की बदहाल कार्यप्रणाली और बच्चों से मजदूरी कराने का एक गंभीर मामला सामने आया है। तेन्दूखेड़ा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम इमलीडोल स्थित एकीकृत शासकीय माध्यमिक विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने आई एक मासूम छात्रा के हाथों में किताबों की जगह झाड़ू थमा दी गई। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में कक्षा के भीतर छात्रा झाड़ू लगाती नजर आ रही है, जबकि पास में ही शिक्षक खड़े तमाशा देख रहे हैं। इमलीडोल स्कूल में छात्रा से झाड़ू लगवाने का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
छात्र-छात्राओं का आरोप है कि स्कूल में उनसे रोजाना कक्षाओं की सफाई करवाई जाती है। सफाई कर्मचारी (चपरासी) न होने के कारण यह बोझ बच्चों पर डाला जा रहा है। यही नहीं, छात्रों ने यह भी शिकायत की है कि निर्धारित समय 10:30 बजे होने के बावजूद शिक्षक अक्सर 11 बजे या उससे भी देर से पहुंचते हैं, जिससे उनका अध्ययन कार्य बुरी तरह बाधित होता है।
जब इस संबंध में स्कूल के प्रधानाध्यापक (HM) प्रकाश मिंज से सवाल किया गया, तो उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना तर्क देते हुए कहा कि विद्यालय में चपरासी नहीं है, इसलिए कभी शिक्षक और कभी बच्चे सफाई कर लेते हैं। जब उनसे पूछा गया कि बच्चे स्कूल पढ़ने आते हैं या झाड़ू लगाने, तो उन्होंने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा, "सभी जगह बच्चे ही झाड़ू लगाते हैं।" इसके बाद नियमों का हवाला दिए जाने पर उन्होंने फोन काट दिया।
इमलीडोल स्कूल में बच्चों के शोषण का यह पहला वाकया नहीं है। इससे पहले 27 जुलाई को भी मध्याह्न भोजन (MDM) के बाद मासूम बच्चों से जूठी थालियां साफ कराने का मामला उजागर हुआ था। उस समय भी प्रधानाध्यापक प्रकाश मिंज ने यही गैर-जिम्मेदाराना दलील दी थी कि 'सभी जगह यही चल रहा है'। बार-बार सामने आ रही इन शिकायतों से ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है और उन्होंने दोषी शिक्षकों पर निलंबन की कार्रवाई की मांग की है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने सख्त रुख अपनाया है:
तेंदूखेड़ा एसडीएम सीजी गोस्वामी ने कहा कि सरकारी विद्यालय में बच्चों से झाड़ू लगवाना सर्वथा अनुचित और नियमों के खिलाफ है। इसके लिए एक जांच दल गठित किया जा रहा है। जांच में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बीआरसी (BRC) पीएल अहिरवार ने स्पष्ट किया कि बच्चों से साफ-सफाई कराना नियम विरुद्ध है। मामले की विस्तृत जांच कराकर संबंधित स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है।
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