
इंदौर के बहुचर्चित भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से 36 लोगों की असामयिक मौत के मामले में सोमवार को इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ में अहम सुनवाई हुई। इस त्रासदी को लेकर दायर कुल सात जनहित याचिकाओं (PILs) पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता के हित में बड़ा निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील गुप्ता की अध्यक्षता वाले एक सदस्यीय जांच आयोग की करीब 600 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट को अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड करने की अनुमति दे दी है।
जांच आयोग ने अगस्त माह में अपनी 600 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत की थी, जिसे अब तक गोपनीय रखा गया था। पूर्व में इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर लगी रोक को हटाते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इसे स्कैन कर एक-दो दिनों के भीतर वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाए।
इस निर्देश के बाद याचिकाकर्ताओं के वकील और मामले से जुड़े पक्षकार रिपोर्ट को ऑनलाइन देख सकेंगे और आगामी बहसों के लिए उसका गहन विधिक अध्ययन कर सकेंगे। इससे पहले वकीलों को केवल रजिस्ट्रार के समक्ष उपस्थित होकर रिपोर्ट देखने और आवश्यक बिंदु नोट करने की ही सीमित अनुमति मिली हुई थी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं और हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष यादव और अधिवक्ता रितेश इनानी ने कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने और उसे सार्वजनिक करने का पुरजोर आग्रह किया था। वकीलों की दलील थी कि 36 निर्दोष नागरिकों की जान जाने और सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने के इस गंभीर मामले में प्रशासनिक व नगर निगम की लापरवाही की जवाबदेही तय करने के लिए रिपोर्ट का अध्ययन बेहद जरूरी है।
हाईकोर्ट ने जनवरी माह में मामले की तह तक जाने के लिए रिटायर्ड जस्टिस सुशील गुप्ता आयोग का गठन किया था। अब रिपोर्ट के ऑनलाइन उपलब्ध होने के बाद मामले में अंतिम बहस और दोषियों पर कानूनी व प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने की दिशा में तेजी आने की उम्मीद है।
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