
कटनी जिले से एक बेहद दुखद और संवेदनशील मामला सामने आया है। ढीमरखेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सिलौडी पुलिस चौकी के लालपुर गांव में शुक्रवार की सुबह एक बुजुर्ग किसान का शव महुआ के पेड़ पर फंदे से लटका हुआ पाया गया। कटनी में किसान की मौत की इस खबर के बाद से पूरे ग्रामीण इलाके में मातम और सनसनी का माहौल है। मृतक की पहचान लालपुर निवासी 58 वर्षीय राजपाल पाल के रूप में की गई है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, राजपाल पाल शुक्रवार की सुबह हमेशा की तरह अपने परिजनों से खेत पर जाने की बात कहकर घर से निकले थे। सुबह करीब 9 बजे जब कुछ ग्रामीण जंगल की तरफ गए, तो उन्होंने राजपाल का शव पेड़ से लटका हुआ देखा। जंगल में इस तरह शव मिलने की सूचना आग की तरह फैली और देखते ही देखते मौके पर भारी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई।
इस घटना को लेकर मृतक के पुत्र आशीष पाल ने बताया कि उन्हें ग्रामीणों के माध्यम से पिता के शव के पेड़ पर लटके होने की खबर मिली थी। जब वे परिवार सहित मौके पर पहुंचे, तो उनके पिता दम तोड़ चुके थे। परिजनों ने इस हृदयविदारक घटना की जानकारी तुरंत सिलौडी पुलिस चौकी को दी।
हालांकि, इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों और ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि बेहद संवेदनशील मामला होने के बावजूद पुलिस चौकी का बल घटना स्थल पर पहुंचने में लगभग 3 घंटे की देरी की। पुलिस की इस कथित लापरवाही और कड़े रवैये को लेकर मौके पर मौजूद ग्रामीणों में भारी नाराजगी और तीखा आक्रोश देखा गया।
लंबी प्रतीक्षा और ग्रामीणों के हंगामे के बाद जब पुलिस बल घटना स्थल पर पहुंचा, तो उन्होंने स्थिति को संभाला। पुलिस ने गवाहों की उपस्थिति में शव को पेड़ से नीचे उतरवाया और पंचनामा की कार्रवाई पूरी की। इसके बाद शव को तुरंत पोस्टमार्टम (PM) के लिए उमरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
कटनी में किसान की मौत और पुलिस की लेट-लतीफी पर उठ रहे सवालों को लेकर अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (SDOP) आकांक्षा चतुर्वेदी ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक जांच में यह मामला आत्महत्या से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और घटना के हर संभावित पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक और सटीक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
एसडीओपी आकांक्षा चतुर्वेदी ने पुलिस की देरी पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जहाँ तक पुलिस के घटना स्थल पर 3 घंटे देरी से पहुंचने का सवाल है, इस लापरवाही की भी विभागीय जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
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