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सिहोरा को जिला बनाने की मांग तेज, भाजपा नेता और पूर्व आरएसएस प्रचारक ने दी अनशन की चेतावनी

जबलपुर. मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले की तहसील सिहोरा को जिला बनाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। इस बार इस मांग की अगुवाई भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व प्रचारकों ने खुद संभाल ली है। नाराज कार्यकर्ताओं ने यहां तक घोषणा की है कि अगर 6 नवंबर तक सिहोरा को जिला घोषित नहीं किया गया, तो वे आमरण अनशन शुरू करेंगे। 

आरएसएस के पूर्व प्रचारक का चेतावनी प्रदर्शन

सिहोरा के भाजपा नेता और आरएसएस के पूर्व प्रचारक प्रमोद साहू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एलान किया कि अब वे शांत नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि सिहोरा के लोगों ने बारबार विकास की उम्मीदों के साथ वोट दिया, लेकिन वादे पूरे नहीं हुए। उन्होंने कहा, “अगर सरकार ने 6 नवंबर तक सिहोरा को जिला नहीं बनाया तो हम अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे।”  

प्रतीकात्मक भू समाधि लेकर जताया विरोध

दो दिन पहले सिहोरा के स्थानीय संगठन “लक्ष्य सिहोरा” के सदस्यों ने इस मांग को लेकर अनोखा प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने मैदान में तीन फीट गहरे गड्ढे खुदवाए और उनमें बैठकर प्रतीकात्मक “भू समाधि” लेने की कोशिश की। संगठन के कार्यकर्ता विकास दुबे ने कहा, “हम अपने साथ हुए धोखे का विरोध कर रहे हैं। चुनाव से पहले भाजपा नेताओं ने वादा किया था कि सिहोरा को जिला बनाया जाएगा, लेकिन सरकार अब खामोश है।”  

सालों पुरानी मांग, कई सरकारें दे चुकी हैं भरोसा

सिहोरा को जिला बनाने की मांग कोई नई नहीं है। दिग्विजय सिंह के शासनकाल में इसके लिए प्राथमिक रणनीति तैयार की गई थी, यहां तक कि नोटिफिकेशन की तैयारी भी चल रही थी। इसके बाद उमा भारती और शिवराज सिंह चौहान दोनों ने अपनेअपने शासनकाल में सिहोरा को जिला घोषित करने का आश्वासन दिया था। हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस दिशा में कदम उठाने की बात कही थी, लेकिन अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।  

लोगों में बढ़ी नाराजगी और अविश्वास

स्थानीय लोगों का कहना है कि सिहोरा, जो जबलपुर से लगभग 40 किलोमीटर दूर है, अब तक जिला नहीं बनने के कारण विकास की दौड़ में पीछे रह गया है। उनका मानना है कि अगर सिहोरा को अलग जिला बना दिया जाता है, तो प्रशासनिक सेवाओं में सुधार होगा, रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्र की बुनियादी सुविधाएं बेहतर होंगी।  

भाजपा सरकार के खिलाफ ही उठी आवाज़

दिलचस्प बात यह है कि सिहोरा को जिला बनाने की यह मांग अब उसी भारतीय जनता पार्टी की सरकार के खिलाफ उठ रही है, जिसने चुनाव के दौरान यह वादा किया था। फिलहाल आंदोलनकारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि मांग पर सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे जिला मुख्यालय पर आमरण अनशन शुरू करेंगे और आंदोलन को राज्यव्यापी स्वरूप देंगे।

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