
भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का अंबेडकर मैदान रविवार को राज्यभर से जुटे हजारों बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों के नारों से गूंज उठा. मप्र विद्युत कर्मचारी संगठन (MPVK) के तत्वावधान में आयोजित इस विशाल धरने में कर्मचारियों ने अपनी सालों पुरानी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला.
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शिवनारायण राजपूत के नेतृत्व में पहुंचे हजारों कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल्द बैठक कर सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह करते हुए अपना मांग पत्र सौंपा.
आश्वासन के बाद भी निराकरण न होने से आक्रोश
प्रदर्शन में शामिल छात्र-नेताओं और कर्मचारी पदाधिकारियों ने बताया कि इससे पहले उनकी समस्याओं को लेकर अपर मुख्य ऊर्जा सचिव और ऊर्जा मंत्री के साथ उच्चस्तरीय बैठकें हो चुकी हैं.
कर्मचारियों की नाराजगी: दोनों बैठकों में ठोस समाधान का आश्वासन मिला था, लेकिन लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी एक भी मांग पूरी नहीं हुई. इसी वादाखिलाफी के विरोध में कर्मचारियों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
आउटसोर्स कर्मचारियों की मुख्य मांगें
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार हरियाणा मॉडल की तर्ज पर कदम उठाती है, तो आउटसोर्स कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित हो सकता है.
इसके अतिरिक्त कर्मचारियों ने 26 दिनों के बजाय 30 दिन का पूरा वेतन भुगतान, लंबित वेतन पुनरीक्षण लागू करने, राष्ट्रीय त्योहारों एवं नाइट ड्यूटी का अतिरिक्त पारिश्रमिक देने और ड्यूटी के दौरान दुर्घटनाग्रस्त होने पर तुरंत कैशलेस इलाज की व्यवस्था की मांग की है.
मांगें न मानने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
मप्र विद्युत कर्मचारी संगठन ने चेतावनी दी है कि वे बिजली व्यवस्था को बिना प्रभावित किए फिलहाल शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं. यदि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जल्द ही कर्मचारी प्रतिनिधियों से मुलाकात कर मांगों पर अंतिम और सकारात्मक फैसला नहीं लेते, तो यह आंदोलन पूरे राज्य में और व्यापक रूप लेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी.
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