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नर्मदापुरम में सरकारी खरीदी के नाम पर 'वजन' का खेल: किसानों से प्रति बोरी 200 ग्राम अतिरिक्त गेहूं की लूट, नियमों की उड़ रही धज्जियां


नर्मदापुरम. मध्य प्रदेश में गेहूं उपार्जन केंद्रों पर किसानों की मेहनत की कमाई पर डाका डालने का मामला सामने आया है। नर्मदापुरम के सांगाखेड़ा कला स्थित उमंग वेयरहाउस खरीदी केंद्र पर सरकारी नियमों को ताक पर रखकर किसानों से निर्धारित मात्रा से अधिक गेहूं तौला जा रहा है। मामले का खुलासा तब हुआ जब एक ही बोरे का वजन दो अलग-अलग कांटों पर अलग-अलग पाया गया।


दो कांटों पर अलग-अलग वजन: कैमरे में कैद हुई धांधली

दैनिक भास्कर की पड़ताल में केंद्र कर्मचारियों की बड़ी लापरवाही और धोखाधड़ी उजागर हुई है। जब केंद्र पर गेहूं से भरे एक बारदान (बोरे) की जांच की गई, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए:

  • पहले कांटे पर वजन: 50.680 किलो।

  • दूसरे कांटे पर वजन: 50.750 किलो।

  • नियम क्या है: खाली बारदान का वजन लगभग 580 ग्राम होता है। नियमतः एक बोरे में कुल वजन 50.580 किलो से 50.600 किलो के बीच होना चाहिए।

  • लूट का गणित: यहाँ किसानों से प्रति बोरी 100 से 200 ग्राम अतिरिक्त गेहूं लिया जा रहा है। हजारों बोरियों की खरीदी में यह आंकड़ा क्विंटल और लाखों रुपये तक पहुंच जाता है।


वेयरहाउस के अंदर 'गुप्त' तुलाई: उपार्जन नीति का उल्लंघन

सरकारी नियमों के अनुसार, गेहूं की तुलाई वेयरहाउस के बाहर खुले परिसर में होनी चाहिए, लेकिन यहाँ खेल अंदर ही चल रहा है।

  1. नियम 10.3.9 का उल्लंघन: गोदाम के अंदर तौल पूरी तरह प्रतिबंधित है। केवल विशेष बारिश की स्थिति में ही इसकी अनुमति मिलती है, लेकिन यहाँ बिना अनुमति के अंदर तुलाई कर सीधे स्टैक लगाया जा रहा है।

  2. फ्लैट तौल की मनाही: उपार्जन नीति के नियम 10.3.8 के अनुसार, अलग-अलग किसानों की उपज को मिलाकर तौलना सख्त मना है, जिससे केंद्र की मान्यता रद्द हो सकती है। लेकिन यहाँ ट्रॉलियों को धर्म कांटे पर तौलकर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

  3. निरीक्षण का अभाव: सबसे गंभीर बात यह है कि अब तक जिला उपार्जन समिति या खंड स्तरीय समिति ने इस केंद्र का निरीक्षण नहीं किया है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।


केंद्र प्रभारी का बयान और किसानों का आक्रोश

पूछताछ करने पर केंद्र प्रभारी दिलीप चौरे ने स्वीकार किया कि 50 किलो 550 ग्राम गेहूं भरा जा रहा है, लेकिन कांटों की गड़बड़ी और अतिरिक्त तौल पर उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था। किसानों का आरोप है कि केंद्र पर उनकी कोई सुनने वाला नहीं है और उनसे खुलेआम लूट की जा रही है।

प्रशासन से मांग की जा रही है कि तत्काल इन केंद्रों की जांच कराई जाए और कांटों का सत्यापन कर दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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