
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर वन विभाग के कार्यक्रम में पौधारोपण करती मंत्री निर्मला भूरिया
झाबुआ। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने प्रकृति के साथ हो रहे मानवीय हस्तक्षेप पर गहरी चिंता व्यक्त की है। झाबुआ में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधारोपण करते हुए उन्होंने कहा कि आज संपूर्ण विश्व ग्लोबल वार्मिंग, वर्षा की अनियमितता, प्लास्टिक प्रदूषण और जल संकट जैसी विकराल पर्यावरणीय समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जहां कभी घने जंगल हुआ करते थे, वहां आज बंजर भूमि का दिखाई देना हमारे भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा है।
मंत्री भूरिया ने नागरिकों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए कहा कि हमारे पूर्वज हमें एक बेहद समृद्ध प्राकृतिक विरासत सौंपकर गए हैं, जिसे सहेजना और आगे बढ़ाना हमारा परम कर्तव्य है। उन्होंने बेंगलुरु जैसे महानगरों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां वर्षों पुराने वृक्ष आज भी वहां के नागरिकों की जागरूकता के कारण पूरी तरह रक्षित हैं। हमें भी अपने पर्यावरण को बचाने के लिए इसी तरह सजग और सक्रिय होना पड़ेगा।

विश्व पर्यावरण दिवस पर 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधारोपण करती ग्रामीण महिलाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में शुरू हुए 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को लेकर उन्होंने कहा कि यह केवल एक दिन का औपचारिक आयोजन नहीं है। यह अभियान धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और पूरे समाज को भावनात्मक रूप से आपस में जोड़ने का एक बेहद अनूठा माध्यम है।
इस अभियान के तहत झाबुआ जिले के लिए एक बड़ा रोडमैप तैयार किया गया है। मंत्री ने घोषणा की कि आगामी 21 जून तक पूरे झाबुआ जिले में 1 लाख पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने अधिकारियों और आम जनता को कड़े निर्देश दिए कि हमारा काम केवल पौधारोपण करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन पौधों को जीवित रखना और उन्हें एक मजबूत वृक्ष के रूप में विकसित करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
अभियान में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस बार तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया कि इस पूरे अभियान की मॉनिटरिंग और पारदर्शिता 'मेरी लाइफ' (Meri LiFE) ऐप के माध्यम से निश्चित की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए कि पूर्व के वर्षों में रोपे गए महुआ के पौधों की विशेष देखरेख की जाए और उनकी लगातार मॉनिटरिंग निश्चित की जाए ताकि वे रक्षित बड़े हो सकें।
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