
मुरैना. मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में चंबल नदी से करीब 4 किलोमीटर दूर स्थित एक गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब 11 फीट लंबा मगरमच्छ एक घर के आंगन में पहुंच गया। रात करीब 11 बजे मवेशियों की आवाज सुनकर जागे परिवार के सदस्यों ने जब आंगन में विशाल मगरमच्छ देखा, तो उनके होश उड़ गए। सूचना मिलने पर चंबल घड़ियाल अभयारण्य की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। मगरमच्छ को पकड़ने के लिए करीब साढ़े तीन घंटे तक अभियान चलाया गया। आखिरकार सुबह लगभग 4 बजे उसे सुरक्षित पकड़कर चंबल नदी में छोड़ दिया गया।
घटना देवगढ़ थाना क्षेत्र के खुलावली गांव में शाला चौकी के पास की है। जानकारी के मुताबिक, गांव के आसपास खेतों में कई ग्रामीणों ने अपने घर बना रखे हैं। इन्हीं में से एक घर में रविवार और सोमवार की दरमियानी रात मगरमच्छ पहुंच गया।
रात करीब 11 बजे मवेशियों के रंभाने की आवाज सुनकर परिवार के लोग जागे। बाहर आकर देखा तो आंगन में लगभग 11 फीट लंबा मगरमच्छ मौजूद था। घर में अचानक इतने बड़े मगरमच्छ को देखकर परिवार के सदस्य घबरा गए। उन्हें अपने मवेशियों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी।
परिवार के सदस्यों ने लंबे डंडों की मदद से मगरमच्छ को घर के आंगन से बाहर खदेड़ा। हालांकि, बाहर निकलने के बाद मगरमच्छ एक जगह पर रुक गया। इसके बाद ग्रामीणों ने मामले की सूचना वन विभाग के अधिकारी डीएफओ एससी बघेल को दी, ताकि मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से पकड़ा जा सके।
सूचना मिलने के बाद रात करीब 12 बजे रेस्क्यू टीम को मौके पर भेजा गया। मगरमच्छ का आकार काफी बड़ा था और वह तेजी से हरकत कर रहा था। इस कारण उसे पकड़ने में टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बताया गया कि रेस्क्यू के दौरान वह कई बार रस्सी और जाल से निकलने में कामयाब रहा।
मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ने के लिए रेस्क्यू अभियान देर रात से सुबह तक जारी रहा। करीब साढ़े तीन घंटे की कोशिशों के बाद सुबह 4 बजे के आसपास टीम ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद मगरमच्छ को चंबल नदी के राजघाट क्षेत्र में ले जाकर छोड़ दिया गया।
चंबल घड़ियाल अभयारण्य के केयरटेकर ज्योति डंडौतिया के अनुसार, आशंका है कि मगरमच्छ नदी से निकलकर किसी छोटे जलाशय में पहुंचा होगा। वहां पर्याप्त भोजन नहीं मिलने के कारण वह आगे बढ़ता गया और चलते-चलते गांव की बस्ती तक पहुंच गया।
चंबल नदी से लगभग 4 किलोमीटर दूर घर के आंगन में मगरमच्छ मिलने की घटना ने ग्रामीणों को सतर्क कर दिया है। इस मामले में वन्यजीव को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से पकड़ना जरूरी था। रेस्क्यू टीम की कार्रवाई के बाद मगरमच्छ को उसके प्राकृतिक आवास यानी चंबल नदी में वापस छोड़ दिया गया।
ग्रामीण इलाकों में नदी, नाले या जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों को ऐसे वन्यजीव दिखाई देने पर उनसे दूरी बनाए रखनी चाहिए। खुद पकड़ने या डंडों से भगाने की कोशिश करने के बजाय वन विभाग या संबंधित रेस्क्यू टीम को सूचना देना अधिक सुरक्षित है।
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