
धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार, 29 अक्टूबर को अहम सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत के न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी संबंधित पक्षों को आवश्यक दस्तावेज व प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके साथ ही अदालत ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ का पूरा रिकॉर्ड भी सभी पक्षों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि मामले की अग्रिम सुनवाई विस्तृत आधार पर की जा सके।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने 15 मई 2026 को दिए अपने फैसले में भोजशाला को ऐतिहासिक रूप से मां सरस्वती का मंदिर मानते हुए हिंदू समाज को परिसर में नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार दिया था। हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में पांच अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। मुस्लिम पक्ष की मांग है कि हाईकोर्ट के इस आदेश पर रोक लगाई जाए और वर्ष 2003 की तत्कालीन व्यवस्था को बहाल किया जाए, जिसके तहत मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज अदा करने की अनुमति थी।
इससे पूर्व 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि, अदालत ने मुस्लिम समाज के लिए शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद प्रशासन ने भोजशाला के पीछे दाईं ओर स्थित खसरा नंबर 612 की जमीन नमाज के लिए निर्धारित की थी। वहीं, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के प्रदेश उपाध्यक्ष व याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने बताया कि संगठन शीर्ष अदालत में चार मामलों में पक्षकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भोजशाला में मां वाग्देवी की प्रतिमा की पुनः स्थापना और इसके ऐतिहासिक गौरव को बहाल करने के लिए कानूनी लड़ाई निरंतर जारी रहेगी।
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