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रामनगर क्षेत्र में अवैध उत्खनन का बोलबाला, खनिज विभाग और कलेक्ट्रेट की रहस्यमयी चुप्पी से उठ रहे सवाल

रामनगर। नवगठित मैहर जिले के रामनगर तहसील अंतर्गत आने वाले दर्जनों गांवों में इन दिनों अवैध उत्खनन का काला कारोबार अपने चरम पर है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में मिट्टी, मुरुम, छछरी, बजरी, गिट्टी और बेशकीमती अयस्क की धड़ल्ले से चोरी हो रही है। इस खेल में जहाँ सीमेंट कंपनियाँ और क्रेशर संचालक चांदी कूट रहे हैं, वहीं खदान मालिक सोने में खेल रहे हैं। दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग जानकारी होने के बावजूद 'जीरो' सक्रियता दिखा रहे हैं।

अधिकारियों का टालमटोल रवैया: हैरानी की बात यह है कि रामनगर के एसडीएम एस.पी. मिश्रा का कहना है कि खनन संबंधी कोई भी जानकारी जिले के खनिज विभाग से ही मिलेगी। वहीं, जब जिला कलेक्टर कार्यालय से ई-मेल के माध्यम से जानकारी मांगी जाती है, तो वहां बैठा कथित तौर पर निकम्मा और भ्रष्ट अमला चुप्पी साध लेता है। महीनों से सूचना के लिए किए जा रहे प्रयासों पर पानी फेरा जा रहा है, जिससे प्रशासन की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं।

प्राकृतिक तंत्र पर प्रहार: अवैध खनन के कारण अरगट, जिगना, खोडरी, हिनौती, मर्यादपुर, सोनवर्षा, देवदहा, झिन्ना, कुबरी और पहाड़ से लगे तमाम गांवों में प्रकृति का कत्ल किया जा रहा है। पहाड़ों को काटने और वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से क्षेत्र का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया है, जिसके परिणामस्वरूप बढ़ता तापमान आने वाले विनाश की कहानी कह रहा है।

ग्रामीणों के लिए 'मौत का सामान': यह खनन न केवल पर्यावरण बल्कि स्थानीय ग्रामीणों, मासूम बच्चों, पशुओं और पक्षियों के लिए भी मौत का सामान साबित हो रहा है। गहरी और असुरक्षित खदानें किसी भी वक्त बड़े हादसे को निमंत्रण दे रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खबरें चलने पर केवल कोरम पूर्ति के लिए दिखावटी कार्यवाही की जाती है, जबकि मोटी कमाई और सांठगांठ के चलते जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है।

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