
बिजुरी। बिजुरी में मध्य प्रदेश शासन की बेशकीमती जमीनों पर कथित अतिक्रमण और अवैध नामांतरण के मामलों ने एक बार फिर हलचल मचा दी है। कुछ दिन पहले जंगल मद की भूमि से जुड़ा बड़ा मामला सामने आने के बाद अब एक और गंभीर मामला संज्ञान में आया है। इस मामले ने बिजुरी के राजस्व महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिजुरी बाजार हल्का अंतर्गत खसरा क्रमांक 539/2/1/1, कुल रकबा 13 एकड़, मध्य प्रदेश शासन के नाम दर्ज भूमि बताई जा रही है। इसी क्रम में खसरा क्रमांक 539, 522/1 सहित अन्य भूमियों को भी मध्य प्रदेश शासन की भूमि बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब इतनी बड़ी भूमि शासन के नाम दर्ज है, तो फिर उसके स्वामित्व, नामांतरण और कथित अतिक्रमण से जुड़े मामलों की वास्तविक स्थिति क्या है?
आखिर सरकारी जमीनों पर क्या चल रहा है?
बिजुरी में बड़े पैमाने पर मध्य प्रदेश शासन की भूमियों को लेकर सामने आ रही शिकायतों ने पूरे क्षेत्र में चर्चा तेज कर दी है। यदि सरकारी जमीनों पर अवैध नामांतरण या अतिक्रमण हुआ है, तो यह गंभीर जांच का विषय है। आखिर संबंधित राजस्व अधिकारियों ने इन मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की? क्या जमीनों के राजस्व अभिलेखों की निष्पक्ष जांच हुई है? और यदि शिकायतें लंबित हैं, तो उन पर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है?
इन सवालों का जवाब अब संबंधित राजस्व अधिकारियों को देना चाहिए, ताकि सरकारी जमीनों की वास्तविक स्थिति जनता के सामने स्पष्ट हो सके।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी कार्रवाई पर सवाल!
सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण और अवैध नामांतरण को लेकर न्यायिक निर्देशों के अनुपालन पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायतों के बावजूद यदि मामले राजस्व स्तर पर लंबित हैं, तो उनकी स्थिति की समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता है। हल्का पटवारी से लेकर संबंधित तहसीलदार तक की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं लापरवाही हुई है या नहीं।
अब देखना होगा—जांच होगी या मामला फाइलों में ही दबा रहेगा?
बिजुरी में मध्य प्रदेश शासन की जमीनों से जुड़े इन मामलों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या सरकारी जमीनों का राजस्व रिकॉर्ड खंगालकर सच्चाई सामने लाई जाएगी, या शिकायतें कार्यालयों की फाइलों में ही उलझी रहेंगी?
अब निगाहें संबंधित राजस्व अधिकारियों पर टिकी हैं। जरूरत है कि खसरा क्रमांक 539/2/1/1 सहित संबंधित भूमियों के रिकॉर्ड, नामांतरण आदेशों और अतिक्रमण संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि कहीं अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई हो और शासन की भूमि को सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
फिलहाल, इस पूरे मामले में संबंधित राजस्व अधिकारियों का पक्ष और आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। उनकी प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए।
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