
देवास जिले के चर्चित चंदाना जहरीली शराब कांड की जांच में पुलिस के हाथ बेहद अहम वैज्ञानिक साक्ष्य लगे हैं। इंदौर से अजय राठौर को भेजे गए केमिकल की रासायनिक जांच में शुक्रवार शाम घातक और जानलेवा ‘मेथनॉल’ की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। कोतवाली थाना प्रभारी शशिकांत चौरसिया के अनुसार, इस पूरे अवैध नेटवर्क में इंदौर के दवा बाजार स्थित अमन कासलीवाल की फर्म 'राइजिंग ब्रदर्स' की मुख्य संलिप्तता उजागर हुई है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य आरोपी अमन कासलीवाल की पुलिस रिमांड 2 नवंबर तक बढ़ा दी है। पुलिस टीम ने आरोपी के कार्यालय की सघन तलाशी लेकर कर्मचारियों और अकाउंटेंट के बयान दर्ज किए हैं, जबकि अमन के निजी लैपटॉप और डिजिटल दस्तावेजों का तकनीकी परीक्षण किया जा रहा है।
पुलिसिया पड़ताल में सामने आया है कि राइजिंग ब्रदर्स फर्म ऑनलाइन बी2बी प्लेटफॉर्म 'इंडिया मार्ट' के जरिए मेथनॉल बेचने के ऑफर पोस्ट कर रही थी, जबकि फर्म के पास इसके लिए कोई वैध कानूनी अनुमति नहीं थी। आरोपी पक्ष ने शुरुआत में दावा किया था कि उन्होंने केवल थिनर की सप्लाई की थी, लेकिन लैब रिपोर्ट ने इस सफेद झूठ का पर्दाफाश कर दिया। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि केमिकल किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर खरीदा गया, जबकि उसकी भौतिक डिलीवरी कहीं और की गई। कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए बिलों में इसे ‘मिक्स सॉल्वेंट’ दर्ज किया गया और ट्रांसपोर्टर को चकमा देने के लिए इसे सामान्य थिनर बताया गया था।
जांच में स्पष्ट हुआ है कि फर्म के पास भारतीय विष अधिनियम (Poisons Act) के तहत जरूरी लाइसेंस तक मौजूद नहीं था। इसके अतिरिक्त अत्यधिक ज्वलनशील और खतरनाक रसायनों के भंडारण व बिक्री हेतु अनिवार्य 'PESO' लाइसेंस का भी पूरी तरह अभाव पाया गया। कार्यालय में वैध स्टॉक रजिस्टर तक मेंटेन नहीं किया जा रहा था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली है कि मेथनॉल की वास्तविक खरीद-फरोख्त का ब्योरा एक अलग गोपनीय रजिस्टर में दर्ज किया जाता था, जिसे घटना के बाद छिपा दिया गया है। पुलिस अब उस छिपे हुए रजिस्टर की बरामदगी के प्रयास में जुटी है, ताकि यह सटीक जानकारी मिल सके कि फर्म ने कुल कितनी मात्रा में मेथनॉल खरीदा, उसका स्टॉक कहां रखा और इस जानलेवा सिंडिकेट के तार किन-किन अवैध शराब माफियाओं से जुड़े हुए हैं।
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