
मैहर। रामनगर क्षेत्र में इन दिनों नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थों की भरमार है, लेकिन जिम्मेदार फूड सुरक्षा विभाग सिर्फ कागजों में डिजिटली आदेश चमकाने में व्यस्त है। जमीन पर हालात यह हैं कि किराना की थोक, फुटकर दुकानों, स्वीट मार्ट और डेयरियों में बिक रहा हर सामान संदेह के घेरे में है।
रैपर चमकदार, अंदर माल मिलावटी -
बाजार में नमकीन, बिस्किट से लेकर अचार, मुरब्बे, मसाले, खाद्य तेल, ड्राई फ्रूट्स तक की गुणवत्ता सिर्फ रैपरों और आकर्षक पैकिंग में दिख रही है। अंदर क्या है, इसका कोई मानक नहीं है।
सबसे चिंताजनक स्थिति बच्चों के लिए मिलने वाले पैकेट बंद सामग्रियों की है। चिप्स, कुरकुरे, टॉफी, जेली, सस्ते बिस्किट की गुणवत्ता का तो भगवान ही मालिक है। सस्ते के चक्कर में मिलावटी मिठाइयों और खाद्य पदार्थों का बाजार गर्म है। त्योहारी सीजन में तो बिना मावा की मिठाइयां और सिंथेटिक रंगों से बनी मिठाइयां खुलेआम बेची जा रही हैं।
फूड सुरक्षा अधिकारी नदारद, साल-दो साल में कोरम पूरा -
इलाके के लोगों का कहना है कि फूड सुरक्षा अधिकारी क्षेत्र से नदारद हैं। कभी-कभार साल-दो साल में एक बार दिखकर तथाकथित फॉर्मलिटी के तहत 2-4 नमूने ले लिए जाते हैं और कोरम पूरा कर दिया जाता है।
खबर के मुताबिक जिले में ही बैठकर फूड सुरक्षा के मानक तय कर लिए जाते हैं और रिपोर्ट बना दी जाती है, जबकि जमीन पर रामनगर की किराना और स्वीट मार्ट की दुकानें अमानक और मिलावटी खाद्य पदार्थों से पटी पड़ी हैं।
सवाल -
1. क्या फूड विभाग किसी बड़ी खाद्य दुर्घटना या बीमारी फैलने का इंतजार कर रहा है?
2. बच्चों के पैकेट बंद फूड और खुली मिठाइयों के नमूने आखिरी बार कब लिए गए थे?
3. जिले में बैठकर आदेश चमकाने से क्या रामनगर की जनता सुरक्षित हो जाएगी?
नगरवासियों ने कलेक्टर मैहर और मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी से मांग की है कि रामनगर में तत्काल सघन जांच अभियान चलाकर किराना, स्वीट मार्ट, डेयरी और थोक व्यापारियों के यहां बिक रहे नमकीन, बिस्किट, मसाले, तेल और मिठाइयों के नमूने लिए जाएं और मिलावटखोरों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
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