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ईरान युद्ध से अमेरिका की चीन के खिलाफ तैयारियों पर दबाव : रो खन्ना

वॉशिंगटन, 18 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी सांसदों ने चेतावनी दी है कि ईरान विवाद अमेरिका की रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर रहा है। वरिष्ठ डेमोक्रेट नेताओं ने कहा है कि चीन और अन्य बड़े खतरे का सामना करने के लिए आवश्यक संसाधनों को दूर स्थानों पर लगाया जा रहा है।

वॉशिंगटन, 18 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी सांसदों ने चेतावनी दी है कि ईरान विवाद अमेरिका की रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर रहा है। वरिष्ठ डेमोक्रेट नेताओं ने कहा है कि चीन और अन्य बड़े खतरे का सामना करने के लिए आवश्यक संसाधनों को दूर स्थानों पर लगाया जा रहा है।

हाउस सेलेक्ट कमेटी ऑन द चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी के रैंकिंग सदस्य रो खन्ना ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्रवाई इंडो-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की निवारक क्षमता को कमजोर कर सकती हैं।

खन्ना ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप का ईरान में गैर-जिम्मेदाराना युद्ध अमेरिका की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को जोखिम में डाल रहा है। अमेरिका को प्रशांत क्षेत्र में शांति व स्थिरता बनाए रखने की बढ़ती चुनौती का मुकाबला करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि प्रशासन “मध्य पूर्व में अनावश्यक हस्तक्षेप के कारण हमारी सशस्त्र सेनाओं को कमजोर कर रहा है।” खन्ना ने संघर्ष के वित्तीय और आर्थिक दबाव की ओर भी ध्यान दिलाया।

उन्होंने कहा, “यह युद्ध टैक्सदाताओं के लिए प्रतिदिन लगभग 1 बिलियन डॉलर खर्च कर रहा है और महत्वपूर्ण गोला-बारूद को समाप्त कर रहा है। इस तरह का खर्च अस्थायी नहीं है और अमेरिकी पहले ही गैस की बढ़ती कीमतों व आर्थिक अनिश्चितता के प्रभाव महसूस कर रहे हैं।”

उन्होंने प्रशासन की बीजिंग से संपर्क करने की नीति की आलोचना करते हुए चेतावनी दी कि इससे गठबंधनों को नुकसान हो सकता है।

खन्ना ने कहा, “अब राष्ट्रपति चीन से युद्धपोत भेजने के लिए कह रहे हैं ताकि उस युद्ध को समाप्त किया जा सके जिसे वे खुद पूरा नहीं कर सकते। यह एक खतरनाक कदम है जो हमारी निवारक क्षमता की रीढ़ के रूप में गठबंधनों को कमजोर कर सकता है।”

एक अलग हाउस आर्म्ड सर्विसेज़ उपसमिति की सुनवाई में प्रतिनिधि सेथ मोल्टन ने इस संघर्ष से उत्पन्न व्यापक सुरक्षा खतरों का सख्त आकलन प्रस्तुत किया।

मोल्टन ने कहा, “हम यह तथ्य नजरअंदाज नहीं कर सकते कि आज जब हम यहां बैठें हैं, अमेरिका पहले से ज्यादा जोखिम में है, चाहे वह मध्य पूर्व हो या घर पर।”

उन्होंने तर्क दिया कि लगातार सैन्य अभियान संसाधनों को समाप्त कर रहे हैं और प्रतिद्वंद्वियों को हिम्मत दे रहे हैं।

उन्होंने कहा, “पद संभालने के 14 महीने बाद ‘शांति के राष्ट्रपति’ ने सात देशों पर हमला किया है और इन चुनी गई लड़ाइयों के माध्यम से दुर्लभ गोला-बारूद समाप्त किए हैं और चीन व रूस दोनों को उत्साहित किया है।”

मोल्टन ने आर्थिक प्रभावों की बढ़ती चिंताओं की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा, “हॉरमज़ जलसंधि बंद होने और तेल की कीमतों में उछाल के कारण, ट्रंप वास्तव में युद्ध हार रहे हैं” और जो खर्च हो रहा है वह “बहादुर युवा अमेरिकी सैनिकों की जानों के साथ-साथ बच्चों और निर्दोष नागरिकों द्वारा भी भरा जा रहा है।”

सांसद ने चेतावनी दी कि अमेरिकी रणनीतिक ध्यान महत्वपूर्ण दीर्घकालिक खतरों से दूर हो रहा है।

उन्होंने कहा, “मध्य पूर्व में सब कुछ गलत होते हुए, अमेरिका की रणनीतिक रक्षा पर ध्यान खोना आसान है, लेकिन यह हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव है और इसे शीर्ष प्राथमिकता बनाए रखना चाहिए।”

उन्होंने चीन की सैन्य क्षमताओं पर बढ़ती चिंताओं को उजागर किया।

मोल्टन ने कहा, “चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का आईसीबीएम बेड़ा अमेरिकी खुफिया अनुमानों को पार कर रहा है और उन्होंने कई हाइपरसोनिक हथियार तैनात किए हैं जो परमाणु हथियार ले जा सकते हैं।”

उन्होंने रूस से आने वाले खतरों की ओर भी ध्यान दिलाते हुए चेतावनी दी कि मॉस्को ने “एक संधि-उल्लंघन करने वाला, अंतरिक्ष-आधारित परमाणु हथियार विकसित किया है, जो उन सभी उपग्रहों को नष्ट कर सकता है जिन पर हम प्रतिदिन जीपीएस और संचार के लिए निर्भर हैं।”

दोनों सांसदों ने जोर दिया कि मध्य पूर्व में लगातार संलग्नता अमेरिका की वैश्विक खतरों का सामना करने की तत्परता को कमजोर कर सकती है। विशेष रूप से एशिया में, जहां चीन के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।

ये बयान उस समय आए हैं जब ईरान संघर्ष अमेरिका की विदेश नीति पर हावी है और वाशिंगटन में संसाधनों के अतिप्रयोग और रणनीतिक विचलन को लेकर चिंता बढ़ गई है।

--आईएएनस

पीएम

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