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जबलपुर: रेलवे के वीआईपी कोटे में बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़, अधिकारियों के फर्जी साइन कर टिकट कन्फर्म कराने वाला बाबू सस्पेंड


जबलपुर: पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) के मुख्यालय में वाणिज्य विभाग के भीतर वीआईपी (VIP) कोटा टिकटों में चल रहे एक बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। यहां तैनात एक कर्मचारी द्वारा रेलवे के उच्च अधिकारियों, मंत्रियों और सांसदों के नाम का दुरुपयोग कर दलालों के लिए अवैध रूप से सीटें कन्फर्म कराई जा रही थीं। मामला उजागर होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है और आरोपी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

साजिश का तरीका: अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर जांच में सामने आया कि आरोपी बाबू, अमित कुमार आनंद, वरिष्ठ अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षरों का सहारा लेकर 'हेड ऑफिस कोटा' (HQ Quota) लगवाता था। यह खेल पिछले कई महीनों से चल रहा था। आरोपी पहले सेवानिवृत्त सीसीएम अजय प्रकाश के साथ कार्यरत था और वर्तमान में सीसीएम राजेश शर्मा के कार्यालय से संबद्ध था। वह अधिकारियों की गैरमौजूदगी या उनकी जानकारी के बिना प्रतिदिन दिल्ली, मुंबई और पुणे जैसे व्यस्त रूटों की 3 से 4 टिकटें कन्फर्म करवाता था। गर्मियों की छुट्टियों में जब आम यात्रियों को सीटें नहीं मिल रही थीं, तब यह कर्मचारी दलालों के साथ मिलकर कोटा सेंधमारी में लगा था।

दिल्ली से मिली एक कॉल ने खोल दी पोल इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब दिल्ली में तैनात रेलवे के एक सतर्क कर्मचारी को कोटे के तहत भेजी गई एक रिक्वेस्ट पर संदेह हुआ। उसने पुष्टि के लिए सीधे संबंधित अधिकारी को फोन लगा दिया। जब अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसी किसी भी टिकट के लिए हस्ताक्षर नहीं किए हैं, तो सारा मामला शीशे की तरह साफ हो गया। इसके बाद जब दस्तावेजों की जांच की गई, तो अमित कुमार आनंद द्वारा किए गए फर्जी हस्ताक्षरों की पुष्टि हुई।

कमेटी गठित, कई रसूखदारों पर गिर सकती है गाज रेलवे प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी कर्मचारी को सस्पेंड कर दिया है और पूरे प्रकरण की तह तक जाने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया है। सूत्रों का कहना है कि यह केवल एक कर्मचारी का काम नहीं हो सकता, इसमें बाहरी दलालों का एक बड़ा नेटवर्क शामिल होने की आशंका है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद आरोपी के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। फिलहाल, रेलवे इस बात की भी जांच कर रहा है कि अब तक इस फर्जीवाड़े के जरिए कितनी टिकटें कन्फर्म की गईं और उससे कितना आर्थिक लाभ कमाया गया।

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